केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता पीयूष गोयल ने कांग्रेस पर चुनाव आयोग के पद का गलत इस्तेमाल करने और पूर्व चुनाव आयुक्तों को राजनीतिक पद देने का आरोप लगाया। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्तियों का हवाला देते हुए कांग्रेस के कामकाज पर सवाल उठाए। मंगलवार को गोयल ने कहा कि कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाती है, लेकिन उसे अपने पुराने रिकॉर्ड पर भी नजर डालनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नेतृत्व में जो NDA सरकार ने चुनाव आयोग को स्वावलंबी तरीके से देशहित और जनहित में काम करने के लिए पूरी तरीके से स्वायत्तता दी है और कोई भी चुनाव आयुक्त जो नियुक्त हुआ हो उसको कोई राजनीतिक लाभ देने का प्रयास नहीं किया है।’
पीयूष गोयल ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एमएस गिल का जिक्र करते हुए कहा कि उनका सफर चुनाव आयोग से संसद और फिर केंद्रीय मंत्रिमंडल तक पहुंचा। उन्होंने इस घटनाक्रम को संभावित राजनीतिक सौदेबाजी से जोड़कर सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन का भी जिक्र किया। गोयल ने दावा किया कि शेषन को मुख्य चुनाव आयुक्त का कार्यकाल खत्म होने के 2 महीने के भीतर गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। संवैधानिक पदों पर काम करने वाले अधिकारियों को बाद में राजनीतिक पद दिए जाने की घटनाओं की जांच होनी चाहिए।
नवीन चावला को चुनाव आयुक्त बनाए जाने का मुद्दा
बीजेपी लीडर ने कहा, ‘कांग्रेस चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाने से पहले अपने शासनकाल में हुए ऐसे फैसलों का जवाब क्यों नहीं देती।’ केंद्रीय मंत्री ने 2005 में नवीन चावला को चुनाव आयुक्त बनाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने इस नियुक्ति में सोनिया गांधी की भूमिका को लेकर सवाल किए। गोयल ने पूछा कि उस समय सरकार कौन चला रहा था और नियुक्ति की जिम्मेदारी किसकी थी। उन्होंने कहा कि उस समय की व्यवस्था में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार की नियुक्ति प्रक्रिया में अहम भूमिका थी। 2009 में तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त एन. गोपालस्वामी ने नवीन चावला को पद से हटाने की सिफारिश की थी। गोपालस्वामी ने चावला के आचरण पर सवाल उठाए थे और उन पर कांग्रेस के पक्ष में काम करने का आरोप लगाया था।
राहुल गांधी के रवैये पर गोयल ने उठाए सवाल
पीयूष गोयल ने दावा किया कि तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व वाली मनमोहन सिंह सरकार ने इस सिफारिश पर कार्रवाई नहीं की। उस समय सोनिया गांधी का सरकार पर प्रभाव था और राहुल गांधी पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का पर्याप्त सम्मान नहीं करते थे। दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पीयूष गोयाल ने राहुल गांधी के रवैये की भी आलोचना की। गोयल ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से राहुल का व्यवहार और दोहरा मापदंड देखने को मिल रहा है। उन्होंने राहुल गांधी की गतिविधियों को बचकाना बताते हुए आरोप लगाया कि इससे संविधान की भावना को नुकसान पहुंचता है।















