शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा की जाती है। इस दौरान भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं और मंत्रों का जाप करते हैं। हिंदू धर्म में देवी की आराधना के लिए षोडशोपचार पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। षोडशोपचार का अर्थ है 16 प्रकार से देवी का सत्कार करना। इसमें मां दुर्गा का आवाहन करने से लेकर उन्हें आसन, वस्त्र, फूल, धूप, दीप और भोग अर्पित करने तक की परंपराएं शामिल हैं। आइए जानते हैं मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा कैसे की जाती है और इस दौरान किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
मां दुर्गा की षोडशोपचार पूजा का महत्व
षोडशोपचार पूजा में देवी को अतिथि के रूप में आमंत्रित करके उनका सोलह प्रकार से आदर-सत्कार किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस विधि से मां दुर्गा की आराधना करने पर भक्त को देवी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। पूजा शुरू करने से पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठें। इसके बाद मां दुर्गा का ध्यान करें और पूजा का संकल्प लें। पूजा के दौरान मन शांत रखें और श्रद्धापूर्वक हर विधि पूरी करें।
आवाहन, आसन और पाद्य-अर्घ्य अर्पित करें
षोडशोपचार पूजा की शुरुआत मां दुर्गा के आवाहन से होती है। सबसे पहले देवी का ध्यान करके उन्हें पूजा में पधारने के लिए आमंत्रित करें। इसके बाद उन्हें आसन अर्पित करें और विधिपूर्वक विराजमान करें। फिर शुद्ध जल से पाद्य के रूप में देवी के चरणों का पूजन करें। इसके बाद अर्घ्य अर्पित करके उनका स्वागत करें और आचमन के लिए थोड़ा जल चढ़ाएं। ये सभी विधियां देवी के प्रति श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करने का प्रतीक मानी जाती हैं।
स्नान, वस्त्र, यज्ञोपवीत और गंध अर्पित करें
अगले चरण में मां दुर्गा को शुद्ध जल या पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद देवी को नए वस्त्र, साड़ी या लाल चुनरी अर्पित करें। पूजा की परंपरा के अनुसार, मां दुर्गा को यज्ञोपवीत यानी जनेऊ भी चढ़ाया जाता है। इसके बाद चंदन और सिंदूर अर्पित करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, मां दुर्गा को लाल रंग प्रिय है, इसलिए पूजा में लाल वस्त्र और लाल फूलों का विशेष महत्व माना जाता है। देवी को अर्पित की जाने वाली सामग्री स्वच्छ और ताजी होनी चाहिए।
पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य चढ़ाएं
इसके बाद मां दुर्गा को ताजे फूल या फूलों की माला अर्पित करें। फिर गूगल या लोबान की धूप दिखाएं और देसी घी का दीपक जलाएं। अगले चरण में देवी को पंचमेवा, फल, खीर, मिठाई या अन्य सात्विक पकवानों का भोग लगाएं। इसके बाद तांबुल के रूप में पान और सुपारी अर्पित करने की परंपरा है। पूजा के इन चरणों में भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार सामग्री चढ़ाते हैं। भोग लगाते समय मां दुर्गा से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।
आरती, प्रदक्षिणा और क्षमा प्रार्थना करें
षोडशोपचार पूजा के अंतिम चरण में मां दुर्गा की विधिपूर्वक आरती करें। इसके बाद देवी की प्रदक्षिणा करें और उनके सामने नतमस्तक होकर आशीर्वाद मांगें। पूजा के दौरान किसी प्रकार की भूल या कमी रह गई हो, तो उसके लिए क्षमा प्रार्थना जरूर करें। नवरात्रि में पूजा करते समय किसी के प्रति गलत विचार ना रखें। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, इन दिनों सात्विक भोजन करना चाहिए और लहसुन, प्याज, मांसाहार तथा मदिरा से परहेज रखना चाहिए। श्रद्धा, स्वच्छता और शांत मन के साथ की गई पूजा को विशेष महत्व दिया जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, विधि-विधान से की गई षोडशोपचार पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और सुख-शांति बनी रहती है।















