आज के दौर में लोग आराम से बैठकर फोन पर घंटों बिताना काफी पसंद करते हैं। हालांकि रात को सोने से पहले फोन पर कुछ मिनटों की स्क्रॉलिंग घंटों में तबदील हो जाती है और आदत बन जाती है। कई बार इसी आदत के चलते लोगों की नींद भी पूरी नहीं पाती। नींद पूरी न होने पर आपकी याददाशत और मानसिक स्वास्थय पर भी काफी बुरा असर पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देर रात फोन चलाना आपके शरीर के लिए काफी नुक्सानदायक हो सकता है, तो आइए जानते हैं कि इस विषय पर विज्ञान क्या कहता है-
मोबाइल की स्क्रीन से ब्लू लाइट निकलती है, जो हमारी Body Clock को नुकसान पहुचाती हैं। यह रोशनी शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन जो नींद लाने और अच्छी नींद बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है उसके उत्पादन को कम कर देती है। जब शरीर में मेलाटोनिन कम होता है तो उससे नींद बार-बार टूटती है और नींद खराब होती हैं। विज्ञान यह नहीं कहता कि सिर्फ रील्स देखना या फोन चलाना सीधे मौत का कारण बनता है। लेकिन अगर इसके कारण लंबे समय तक नींद की कमी, तनाव, मोटापा, हृदय रोग और अन्य बीमारियां विकसित होती हैं, तो यह समय से पहले मृत्यु के खतरे को बढ़ा सकता है।
मक्खियों पर की स्टडी
इस बात को समझने के लिए विज्ञान ने फलों की मक्खियों (Fruit Flies) पर एक स्टडी की। Research में मक्खियों को लगातार कई दिनों तक मोबाइल जैसी नीली रोशनी के सामने रखा गया। फिर बाद में पता चला कि वो रोशनी उनकी नर्व सेल्स को नुकसान पहुंचा रही है और उनकी उम्र भी काफी कम हो गई है। हालांकि, इस अध्ययन से यह कहना सही नहीं होगा कि मोबाइल की नीली रोशनी इंसानों की उम्र सीधे तौर पर घटा देती है। अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है। फिर भी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी आदत का लंबे समय तक छोटे जीवों पर नकारात्मक असर देखा गया है, तो इंसानों के लिए भी उससे सावधानी बरतना जरूरी है, खासकर तब जब वह नींद, मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती हो।
लंबे समय तक फोन देखने से हो सकती है ये बीमारी
लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन पर रील्स देखने और लगातार स्क्रॉलिंग करने से आंखों पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, लगातार स्क्रीन देखने से Digital Eye Strain या कंप्यूटर विजन सिंड्रोम की समस्या हो सकती है। इसके कारण आंखों में सूखापन, जलन, खुजली, धुंधला दिखना, सिरदर्द और आंखों में थकान जैसी परेशानियां बढ़ सकती हैं। जब भी लोग लगातार फोन चलाते है तो सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं, जिससे आंखों की नमी कम होने लगती है और ड्राई आई की समस्या हो सकती है। हालांकि, अब तक ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है कि मोबाइल की नीली रोशनी सीधे तौर पर आंखों को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन लंबे समय तक स्क्रीन को देखने से आंखों की परेशानी और असुविधा बढ़ा सकती है।
बच्चों पर पड़ रहा है बुरा असर
विशेषज्ञों का कहना है कि देर रात तक मोबाइल चलाने और रील्स देखने की आदत का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। इस उम्र में शरीर और दिमाग तेजी से विकसित हो रहे होते हैं, इसलिए अच्छी नींद उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बेहद जरूरी होती है। लगातार स्क्रीन टाइम और कम नींद के कारण बच्चों की पढ़ाई पर असर पड़ता है, चिड़चिड़ापन, तनाव और व्यवहार संबंधी समस्याएं बढ़ती हैं। कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि जरूरत से ज्यादा सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाले बच्चों में चिंता, भी बढ़ जाती है। इसके अलावा, देर रात तक जागने की आदत बच्चों की Biological Clock को भी प्रभावित करती है, जिससे सुबह उठने में परेशानी, दिनभर थकान देखने को मिल सकती है। इसलिए विशेषज्ञ बच्चों और किशोरों के लिए स्क्रीन टाइम सीमित करने और सोने से पहले मोबाइल से दूरी बनाने की सलाह देते हैं।
पाचन तंत्र भी होता है प्रभावित
रातभर फोन चलाने का सीधा असर हमारे पाचन तंत्र पर पड़ता है। वैज्ञानिक रिर्सच के अनुसार पेट और दिमाग Gut-Brain Axis के जरिए जुड़े हुए हैं। इसी कारण से दिमाग में होने वाली हर हलचल का असर तुरंत हमारे पाचन पर होता है।














