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इंडिया गठबंधन की बैठक: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित इन पांच बिंदुओं पर बनी सहमति

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ ने चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) के मुद्दों को लेकर सोमवार को शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की मांग की और कहा कि “वोट लूट” के विषय पर वे जल्द ही प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत को पत्र लिखेंगे।

विपक्षी गठबंधन की अगली बैठक हैदराबाद में होगी
विपक्षी गठबंधन ने यह भी कहा कि सरकार को गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, किसानों तथा जनसरोकारों से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए। ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) ने यह सहमति भी जताई कि उसके नेता हर दो महीने पर बैठक करेंगे और अगली बैठक हैदराबाद में होगी। बैठक के बाद खरगे ने संवाददाताओं से कहा, “इंडिया जनबंधन ने पांच बिंदुओं पर सहमति जताई है। यह सहमति बनी कि वोट लूट, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर), मतदाता सूची में हेरफेर तथा चुनावों की निष्पक्षता पर उठे गंभीर प्रश्नों के संबंध में भारत के माननीय प्रधान न्यायाधीश को एक पत्र भेजा जाएगा। यह पत्र शीघ्र ही उन्हें सौंपा जाएगा।

परीक्षा को लेकर विपक्ष ने उठाए सवाल
उन्होंने कहा कि लाखों विद्यार्थियों को प्रभावित करने वाले अनेक गंभीर मुद्दों की स्थिति को देखते हुए, सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि शिक्षा मंत्री के तत्काल इस्तीफे की मांग की जाए, क्योंकि उनके कार्यकाल में नीट और सीबीएसई परीक्षाओं में शामिल लाखों युवाओं के साथ विश्वासघात हुआ है। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “वर्तमान गंभीर आर्थिक स्थिति, बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई, किसानों तथा जनसरोकार से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार को तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए।

खरगे ने कहा, “मानसून सत्र के दौरान संसदीय समन्वय जारी रहेगा और प्रतिदिन प्रातःकाल माननीय नेता प्रतिपक्ष (मल्लिकार्जुन खरगे) के कार्यालय में समन्वय बैठक आयोजित की जाएगी।” ‘इंडिया’ के घटक दलों की बैठक सोमवार को यहां हुई, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से मुकाबला करने और एकजुट होकर आगे बढ़ने की रणनीति पर चर्चा की गयी। राष्ट्रीय राजधानी के ‘कॉन्स्टीट्यूशन क्लब’ में हुई इस बैठक में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी, पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की सुप्रिया सुले समेत 23 दलों के प्रमुख नेताओं ने भाग लिया।

शिवसेना (उबाठा) के उद्धव ठाकरे इस बैठक में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से जुड़े थे। बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता एवं जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की नेता महबूबा मुफ्ती, झारखंड मुक्ति मोर्चा के सभी सरफराज अहमद, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के जॉन ब्रिटास, भाकपा महासचिव डी. राजा, भाकपा (माले) लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य और कई अन्य दलों के नेताओं ने भाग लिया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रविवार को कहा था कि 22 राजनीतिक दलों ने ‘इंडिया’ की बैठक में भागीदारी की पुष्टि की है ।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) और आम आदमी पार्टी (आप) बैठक में शामिल नहीं हुईं। ‘आप’ पहले ही सार्वजनिक रूप से इस गठबंधन से दूरी बना चुकी है जबकि द्रमुक ने तमिलनाडु में कांग्रेस द्वारा उससे संबंध तोड़कर टीवीके-नीत सरकार में शामिल होने के बाद बैठक का बहिष्कार करने का फैसला करने की घोषणा की थी बैठक में तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) के शामिल नहीं होने से जुड़े सवाल पर कांग्रेस सूत्रों ने कहा, “टीवीके इस बैठक में शामिल नहीं हुई क्योंकि केवल उन पार्टियों को आमंत्रित किया गया था, जिनके संसद में सदस्य हैं।

सूत्रों ने कहा, “2024 से पहले इंडिया गठबंधन में शामिल होने वाली कुछ पार्टियां आज की बैठक में शामिल रहीं, भले ही उनके पास वर्तमान में सांसद नहीं हैं। इंडिया गठबंधन विस्तार की राह पर है, जल्द ही और पार्टियां इसमें शामिल होंगी।” पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की हालिया हार ने भी विपक्षी गठबंधन को देश में भाजपा के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए एकजुट होने को मजबूर किया। इससे पहले, इंडिया गठबंधन की आधिकारिक बैठक जून, 2024 में हुई थी। बैठक में दिए शुरुआती संबोधन में खरगे ने सोमवार को ‘इंडिया’ गठबंधन के दलों का आह्वान किया कि वे मोदी सरकार द्वारा खड़ी की गई चुनौतियों से निपटने के लिए उस एकजुटता की भावना को और मजबूत करें, जो इस साल 17 अप्रैल को महिला आरक्षण एवं परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक के खिलाफ दिखी थी। उन्होंने यह दावा भी किया कि सरकार संविधान पर हमला जारी रखे हुए है।

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