सलीम,जयंत या लक्ष्मी, उलझन में संगठन।

न्यूज डेस्क। रायगढ़ नगर निगम में महज 12 पार्षदों के साथ अल्पमत में आई कांग्रेस नेता प्रतिपक्ष का चयन नहीं कर पा रही है। नेता प्रतिपक्ष के लिए लगातार बैठकें हो रही है पर्यवेक्षक का दौरा भी हो चुका है, लेकिन आपसी खींचतान और गुटबाजी के चलते एक नाम तय नहीं हो पा रहा है। इधर भाजपा कांग्रेस की आपसी गुटबाजी और कलह को लेकर तंज कस रही है। भाजपा का कहना है कि चंद पार्षदों के बावजूद नेता प्रतिपक्ष ना हो पाना इस बात को दर्शा रहा है कि कांग्रेस में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। कांग्रेस को इस पर चिंतन की जरूरत है।

दरअसल 48 वार्ड वाले रायगढ़ नगर निगम में इस बार भाजपा के केवल 12 पार्षद जीत कर आए हैं। लिहाजा कांग्रेस नगर निगम में विपक्ष की भूमिका में है और कांग्रेस को नेता प्रतिपक्ष तय करना है। लेकिन 12 पार्षदों के बावजूद नेता प्रतिपक्ष के लिए एक नाम तय कर पाना कांग्रेस के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि नेता प्रतिपक्ष के लिए तीन बड़े चेहरों के बीच खींचतान की स्थिति है।
नेता प्रतिपक्ष की दौड़ में शामिल पूर्व सभापति और 6 बार के पार्षद रहे जयंत ठेठवार, पूर्व सभापति और सात बार के पार्षद सलीम नियारिया, चार बार के पार्षद और एमआईसी मेंबर रहे लक्ष्मी साहू के नाम के बीच एक राय नहीं हो पा रही है। हाल ही में पर्यवेक्षक चंद्रदेव राय ने कांग्रेस पार्षदों की बैठक लेकर वोटिंग कराई थी, लेकिन इसके बावजूद भी बहुमत पर सहमति नहीं बन पाई। आलम यह है की मामला वहीं का वहीं अटका हुआ है। मामले को लेकर भाजपा तंज कस रही है। भाजपा का कहना है कि चंद्र पार्षदों के बाद भी आम सहमति नहीं बन पाना बेहद हास्यास्पद है। कांग्रेस को इस स्थिति के लिए चिंतन की जरूरत है।
इधर मामले को लेकर कांग्रेस सफाई दे रही है। कांग्रेस का कहना है कि रायगढ़ ही नहीं कई अन्य निकायों में नेता प्रतिपक्ष के नाम तय नहीं हो पाए हैं। प्रदेश संगठन ने पर्यवेक्षक की नियुक्ति कर सबसे 121 चर्चा की है। जल्द ही नाम की घोषणा हो जाएगी। भाजपा को कांग्रेस की बजाए अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए।












