शहरी क्षेत्रों में चार हजार आवास अब तक अधूरे, निकाय नहीं ले रहे रुचि।

न्यून डेस्क रायगढ़। रायगढ़ जिले में ग्रामीण इलाकों में भले ही पीएम आवास निर्माण की स्थिति बेहतर हो लेकिन नगरीय निकायों में पीएम आवास निर्माण की स्थिति बेहद खराब है। जानकार हैरत होगी कि निकायों में 4000 से अधिक पीएम आवास पिछले दो सालों से अधूरे पड़े हैं। इन आवासों के लिए साल 2021 में राशि जारी हुई थी लेकिन उसके बाद फंड की कमी के चलते निर्माण अधूरे पड़े हैं। ऐसे में शहरी हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।

दरअसल पीएम आवास योजना के तहत जिले के सभी निकायों को आवास निर्माण का टारगेट मिला था। रायगढ़ जिले के सात निकायों के लिए साल 2021 में 2106, साल 2022 में 1658, साल 2023 में 461 आवासों का निर्माण स्वीकृत किया गया था। जानकर हैरत होगी कि 4 सालों बाद भी इसमें से 4000 आवास अब तक अधूरे हैं।
राज्य शासन से राशि जारी नहीं होने की वजह से आवासों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है। आंकड़े सामने आने के बाद कांग्रेस राज्य सरकार पर निशाना साध रही है। कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश में काबिज होते ही राज्य सरकार ने पीएम आवास को लेकर बड़ी-बड़ी बातें कही थी, लेकिन सरकार के सभी दावे खोखले साबित हुए। जिन जिन निकायों में कांग्रेस काबिज थी वहां जानबूझकर राशि जारी नहीं की गई। लिहाजा आवास अधूरे हैं और हितग्राहियों को योजना का लाभ नहीं मिल रहा है।
इधर मामले में मेयर ने सफाई दी है। मेयर का कहना है कि पूर्ववर्ती शहर सरकार ने पीएम आवासों के निर्माण में रुचि नहीं दिखाई, जिसकी वजह से आवास अधूरे रहे। राज्य सरकार से अधूरे आवासों के लिए फंड की मांग की गई है। राशि मिलते ही न सिर्फ आवासों को पूर्ण किया जाएगा बल्कि उनका आवंटन भी किया जाएगा।












