न्यूज डेस्क। रायगढ़ जिले में बच्चे सरकारी स्कूलों में दाखिला तो ले रहे हैं लेकिन दाखिले के बाद मिड सेशन में ही स्कूलों से दूरी बना रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि नवमीं से लेकर 12 वीं तक हर साल औसतन 9 हजार से अधिक बच्चे पढाई से दूर हो रहे हैं। स्कूल शिक्षा विभाग को भेजी गई रिपोर्ट में ये आंकड़े उजागर हुए हैं जिसके बाद शिक्षा गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल केंद्र सरकार ने सर्व शिक्षा अभियान के तहत सभी बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोडने का निर्देश दिया है। इसके लिए सर्व शिक्षा अभियान भी चलाया जा रहा है। लेकिन इन सबके बावजूद स्कूलों से बच्चों का मोहभंग हो रहा है। जी हां रायगढ़ जिले के आंकड़े कुछ यही बयां कर रहे हैं। जानकर हैरत होगी कि जिले में नवमीं से लेकर 12 वीं तक हर साल 9 हजार से अधिक दाखिले के बाद आधे सत्र से ही पढाई से दूरी बना रहे हैं। आंकडों पर ध्यान दें तो साल 2023 -24 में नवमीं में 1690 बच्चे, दसवीं में 2404, 11 वीं में 4376 और बारहवीं में दाखिले के बाद 1233 बच्चे स्कूल ही नहीं गए। खास बात ये है कि बीते साल भी तकरीबन 8 हजार बच्चों ने दाखिले के बाद बीच सत्र में ही पढाई छोड़ दी थी। आंकड़े सामने आने के बाद सर्व शिक्षा अभियान के दावों की पोल खुल रही है। आंकड़ों पर शिक्षाविद भी चिंता जता रहे हैं। शिक्षा विद प्रो अंबिका वर्मा का कहना है कि शिक्षा विभाग को न सिर्फ बच्चों के ड्राप आउट होने के कारणों का पता लगाना चाहिए बल्कि उन्हें फिर से शिक्षा से जोडने के लिए भी प्रयास करने की जरुरत है। इधऱ अधिकारी इन आंकडों को खारिज कर रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बी बाखला का कहना है कि जिन बच्चों ने पढाई छोडी है उनमें से कुछ दूसरे स्कूलों में पढाई कर रहे हैं। फिर भी ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हासिल करने संबंधित स्कूलों को निर्देशित किया गया है। बच्चों को फिर से शिक्षा से जोडने के लिए सतत प्रयास किए जा रहे हैं।













