न्यूज डेस्क, रायगढ़। शहर में बाढ़ प्रभावित इलाकों में नालों के किनारे रिटेनिंग वॉल बनाने की योजना 3 सालों बाद भी धरातल पर नहीं उतर पा रही है। योजना के तहत नगर निगम ने निचली बस्तियों का सर्वे किया था और रिटेनिंग वॉल निर्माण के लिए 3 करोड रुपए का प्रावधान भी किया था। लेकिन अब तक योजना कागजों में ही लटकी हुई है। बारिश सर पर है ऐसे में एक बार फिर निचली बस्ती के बाशिंदे बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर होंगे।
दरअसल रायगढ़ शहर में हर साल दर्जन भर से अधिक वार्ड बाढ़ की चपेटमें आते हैं। शहर में इंदिरा नगर, पैठू डबरी, लक्ष्मीपुर, दीनदयालपुरम, विनोबा नगर, मोदी नगर, चिरंजीव दास नगर, स्टेशन पारा जैसे कुछ इलाके ऐसे हैं जो कि नालों के किनारे बसे हैं। इन इलाकों में हर बारिश में नालों का पानी मोहल्ले में भर जाता है जिससे बाढ़ की स्थिति निर्मित होती है। इसे देखते हुए नगर निगम ने बाढ़ प्रभावित इलाकों का सर्वे कराया था। नगर निगम ने इन इलाकों में नालों के किनारे रिटेनिंग वॉल बनाकर बाढ़ का पानी रोकने की योजना बनाई थी। नगर निगम के सालाना बजट में इसके लिए 3 करोड रुपए का प्रावधान भी किया गया था। लेकिन यह विडंबना कहीं जाएगी की 3 सालों के बाद भी योजना फाइलों में दबी पड़ी है। इधर बाढ़ प्रभावित इलाके के लोग हर साल बाढ़ की त्रासदी झेलने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि बारिश पूर्व अगर नालों की सफाई की जाए और नालों के किनारे रिटेनिंग वाल बना दिए जाएं तो बाढ़ की समस्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी। लेकिन 3 सालों से योजना केवल कागजों में पड़ी है। बारिश आने वाली है ऐसे में वे बाढ़ की आशंका से सहमे हुए हैं। इधर मामले में नगर निगम नियमित सफाई होने का दावा कर रहा है। नगर निगम की महापौर का कहना है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में जेसीबी और सफाई कर्मियों के द्वारा लगातार सफाई कराई जा रही है। नगर निगम ने शहर में नालों के किनारे रिटेनिंग वॉल की योजना बनाई है और इसका प्रस्ताव बनाकर राज्य शासन को भेजा गया है। लेकिन प्रदेश में सरकार बदलने की वजह से योजना अटकी हुई है। इस संबंध में शासन से पत्राचार भी किया जाएगा।














