नई दिल्ली। अगर आपने पुराने जमाने के घर देखे होंगे, तो उनके दरवाजों के आगे चबूतरे बने होते थे। आज के घरों से भले ही चबूतरे गायब हो चुके हैं, लेकिन पुराने समय में ये घर का अहम हिस्सा हुआ करते थे और इनके बिना घर का डिजाइन पूरा नहीं होता था। ऐसे में सवाल आता है कि आखिर पुराने समय में लोगों को अपने घर के आगे चबूतरा बनवाने की क्यों जरूरत पड़ती थी? आइए जानें पुराने घरों के आगे चबूतरा क्यों बनाया जाता था।
लोगों के मिलने-जुलने की जगह
पुराने समय में आज की तरह लोग फेसबुक या सोशल मीडिया पर एक-दूसरे से बात नहीं किया करते थे। न ही उस वक्त मनोरंजन के लिए सभी घरों में टीवी हुआ करते थे। ऐसे में अपना दिल बहलाने के लिए लोग शाम को इकट्ठा हुआ करते और देश-दुनिया की बातें करके अपना दिल बहलाते थे। घर का चबूतरा वहीं जगह हुआ करता था, जहां शाम को लोग इकट्ठा होते थे। इसलिए चबूतरा लोगों के मिलने-जुलने का पॉइन्ट हुआ करता था।
घर की प्राइवेसी
अगर कोई अजनबी घर आया है या काम के सिलसिले में कोई घर आया है, तो उसे सीधा घर के अंदर ले जाने के बजाय घर के चबूतरे पर बैठाया जाता था। इससे घर के अंदर प्राइवेसी बनी रहती थी, खासकर महिलाओं की। उन्हें अपने काम छोड़कर घूंघट नहीं करना पड़ता और वो अपने काम भी आराम से कर पाती थीं। इसलिए घर के आगे चबूतरा बनाया जाता था, ताकि बाहरी मेहमानों को बैठाया जा सके।
घर के कामों की भी जगह
चबूतरा सिर्फ मेहमानों या शाम को मर्दों के बैठने की जगह नहीं था। घर की महिलाएं भी अपने रोजमर्रा के कामों के लिए चबूतरे का इस्तेमाल करती थीं। बाहर बैठकर अनाज साफ करने, सर्दियों में धूप सेकने या दोपहर में इकट्ठा होकर हंसी-मजाक करने के लिए भी चबूतरे का इस्तेमाल किया जाता था।
सुरक्षा से जुड़े कारण
घर के बाहर बना ऊंचा चबूतरा घर में बारिश का पानी या कीचड़ आने से रोकता था। इससे घर गंदा नहीं होता। साथ ही, ऊंचा चबूतरा घर में रेंगने वाले कीड़ों को आने से भी रोकता था। इसलिए चबूतरा घर की सुरक्षा में भी योगदान निभाता था।















