स्वीकृत पदों की तुलना में सिर्फ पच्चीस फीसदी कर्मचारी।

रायगढ़ । नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी की स्थापना को 5 साल होने को आए लेकिन अब तक यूनिवर्सिटी में स्वीकृत पदों की तुलना में 25 फ़ीसदी पदों पर भी नियुक्तियां नहीं हो पाई है। यूनिवर्सिटी में कुल सचिव, उप कुलसचिव सहित 35 से अधिक पद रिक्त पड़े हैं। जिन पदों पर नियुक्तियां है वह भी संविदा पर है। ऐसे में स्टाफ की कमी की वजह से न सिर्फ यूनिवर्सिटी का कामकाज प्रभावित हो रहा है बल्कि एकेडमिक कैलेंडर के मुताबिक एग्जाम कंडक्ट कराने से लेकर नतीजे जारी करने में भी देरी हो रही है। ऐसे में अव्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल बिलासपुर की अटल यूनिवर्सिटी से अलग होकर रायगढ़ में नंदकुमार पटेल यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई । इस दौरान रायगढ़ जांजगीर जिले के 130 कॉलेज को यूनिवर्सिटी से संबद्ध किया गया। यूनिवर्सिटी प्रबंधन की ओर से राज्य शासन को 190 पदों का सेटअप स्वीकृति के लिए भेजा गया था। लेकिन राज्य शासन ने सिर्फ 60 पदों की स्वीकृति दी। लेकिन जानकर हैरत होगी कि स्वीकृति के बाद भी यूनिवर्सिटी में सिर्फ 10 नियमित पदों पर भर्ती हो पाई है। बाकी के 20 पदों पर संविदा कर्मचारी हैं। यूनिवर्सिटी में कुल सचिव उप कुल सचिव रजिस्ट्रार, प्रोफेसर, असिस्टेंट प्रोफेसर सहित 30 से अधिक पद अभी भी रिक्त हैं। रिक्त पदों की वजह से यूनिवर्सिटी को न सिर्फ एग्जाम कंडक्ट कराने में दिक्कतें हो रही है बल्कि एकेडमिक कैलेंडर का भी पालन ठीक से नहीं हो पा रहा है।
आए दिन नतीजे में देरी और गड़बड़ियों को लेकर भी यूनिवर्सिटी सुर्खियों में है। मामले को लेकर छात्र संगठन सवाल उठा रहे हैं। छात्र संगठनों का कहना है कि शासन यूनिवर्सिटी की व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है, जिसकी वजह से छात्र-छात्राओं को दिक्कतें हो रही है। इधर मामले में यूनिवर्सिटी प्रबंधन भी नियुक्तियां नहीं होने की बात स्वीकार कर रहा है। कुलपति ललित प्रकाश पटेरिया का कहना है कि राज्य शासन को रिक्त पदों के बारे में जानकारी भेजी गई है। नियुक्तियों के लिए प्रयास किया जा रहे हैं। कर्मचारियों की कमी की वजह से कामकाज प्रभावित हो रहा है, फिर भी बेहतर से बेहतर करने का प्रयास किया जा रहा है।












