ओमान तट के पास हुए हमले में लापता भारतीय मरीन इंजीनियर हेरंब करमरकर (30) की मौत हो गई है। उनके ससुर विवेक टंडन ने अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि जहाज संचालित करने वाली कंपनी ने उन्हें हेरंब की मौत की सूचना दी है। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस पर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। हेरंब करमरकर साइप्रस के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Galaxy पर मरीन इंजीनियर के रूप में तैनात थे। यह जहाज रविवार को ओमान तट के पास एक अज्ञात प्रोजेक्टाइल (मिसाइल/गोला) की चपेट में आ गया था। जहाज पर कुल 24 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 11 भारतीय शामिल थे।
ईरान ने हमले की जिम्मेदारी ली
ईरान ने दावा किया कि जहाज ने चेतावनी के बावजूद “अनधिकृत समुद्री मार्ग” का इस्तेमाल किया, जिसके बाद उस पर हमला किया गया। यह घटना ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव फिर चरम पर पहुंच गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर टकराव जारी है। हेरंब करमरकर की मौत तीन दिनों के भीतर होर्मुज क्षेत्र में दूसरे भारतीय नाविक की मौत है। इससे पहले मंगलवार को भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो तेल टैंकरों पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की जान चली गई थी। इस घटना के बाद भारत सरकार ने ईरान के उप राजदूत को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया था।
केंद्र सरकार ने उठाए बड़े कदम
लगातार हो रहे हमलों के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल की अध्यक्षता में हुई अंतर-मंत्रालयी बैठक में तय किया गया कि:
सभी भारतीय नाविकों की रियल-टाइम निगरानी के लिए विशेष ऑपरेशनल डैशबोर्ड बनाया जाएगा।
प्रभावित प्रत्येक परिवार के लिए एक समर्पित संपर्क अधिकारी (Liaison Officer) नियुक्त किया जाएगा।
पश्चिम एशिया में तैनात भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर लगातार निगरानी रखी जाएगी।
सरकार ने कहा कि उसकी प्राथमिकता “Seafarer First” यानी भारतीय नाविकों की सुरक्षा रहेगी।
GFS Galaxy पर हमले के अलावा हाल ही में MT Al Bahiyah और MT Mombasa नामक तेल टैंकरों पर भी हमले हुए थे। इन दोनों जहाजों पर कुल 46 चालक दल के सदस्य सवार थे, जिनमें 30 भारतीय शामिल थे। लगातार हो रहे हमलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।














