नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में हाल ही में एक तलाक और वैवाहिक विवाद की सुनवाई के दौरान बेहद दिलचस्प और तीखी बहस देखने को मिली। इस मामले में पति-पत्नी महज 7 महीने तक ही साथ रहे थे, लेकिन विवाद इतना गहरा गया कि यह कानूनी और आर्थिक रूप से पति के परिवार के लिए भारी पड़ गया।
पति का दर्द: अब वह मुझसे और क्या लेगी?
सुनवाई के दौरान पति के वकील ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि यह जोड़ा शादी के बाद केवल 7 महीने ही साथ रहा था। पति समझौते के तहत पहले ही अपनी पत्नी को 1.65 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान कर चुका है। हताशा जताते हुए वकील ने कोर्ट से पूछा कि इतना पैसा देने के बाद अब पत्नी उनसे और क्या लेना चाहती है।
वकील ने अदालत से इस मामले को तुरंत खत्म करने की गुहार लगाई। उन्होंने बताया कि इस एक विवाद के कारण उनके पूरे परिवार को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। पत्नी ने उनके परिवार के खिलाफ कुल 21 अलग-अलग मामले दर्ज कराए हैं, जिसके चलते पति की बहन और पिता दोनों को जेल तक की हवा खानी पड़ी।
शेक्सपियर के ‘शाइलॉक’ से तुलना
पत्नी की लगातार बढ़ती मांगों से परेशान होकर पति के वकील ने मशहूर नाटककार विलियम शेक्सपियर के नाटक ‘द मर्चेंट ऑफ वेनिस’ के क्रूर चरित्र ‘शाइलॉक’ का उदाहरण दिया। वकील ने कहा, ‘वह शाइलॉक की तरह बर्ताव कर रही है, जो अपने कर्ज के बदले शरीर से ‘एक पाउंड मांस’ मांगता है।’ पति ने कोर्ट से मिन्नत की कि उसकी आर्थिक क्षमता अब खत्म हो चुकी है और वह अब और पैसे नहीं दे सकता।
पत्नी के वकील की दलील: गिरवी रखा गया सोना
दूसरी ओर, पत्नी के वकील ने अदालत को बताया कि मामला सिर्फ नकद भुगतान का नहीं है। पत्नी का 1 किलो सोना ससुराल वालों के पास था, जिसे उन्होंने गिरवी रख दिया था। वकील ने स्पष्ट किया कि दोनों पक्षों के बीच जो भी पिछला समझौता हुआ था, उसके अनुसार पत्नी को न केवल तय की गई नकद राशि मिलनी चाहिए, बल्कि उसका 1 किलो सोना भी वापस किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, अदालत ने मामले का अंतिम निपटारा करने का फैसला किया। शुरुआत में अदालत ने पति को निर्देश दिया कि वह अपनी पत्नी का 1 किलो सोना वापस करे। जब पति ने कहा कि वह अब और खर्च उठाने की स्थिति में नहीं है, तो कोर्ट ने उस 1 किलो सोने के बदले नकद भुगतान का आदेश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया कि पति सोने के मूल्य के रूप में 1.25 करोड़ रुपये का भुगतान करे। कोर्ट ने यह शर्त भी रख दी कि जब पति इस पूरी रकम (1.25 करोड़ रुपये) का भुगतान कर देगा, तभी इस जोड़े को कानूनी रूप से तलाक की मंजूरी दी जाएगी।















