असर की रिपोर्ट में खुलासा, 53 फ़ीसदी बच्चे जोड़ घटाना गुणा भाग में कमजोर
न्यूज डेस्क। रायगढ़ जिले के प्राइमरी और मिडिल स्कूलों में शिक्षा का स्तर बेहद कमजोर है।। यह हम नहीं कह रहे बल्कि असर यानी एनुअल स्टेट्स ऑफ़ एजूकेशन रिपोर्ट के आंकड़े कह रहे हैं। बीते साल 2024 में शासकीय स्कूलों के सर्वे में यह बात उजागर हुई है। सर्वे में यह बात सामने आई है कि शासकीय स्कूलों के 53 फ़ीसदी बच्चे जोड़ घटाना गुणा भाग में कमजोर हैं। 19 फ़ीसदी बच्चे रीडिंग में कमजोर पाए गए हैं। आंकड़े सामने आने के बाद शिक्षा विभागीय अधिकारी शिक्षा गुणवत्ता में सुधार की बात कह रहे हैं।
दरअसल शिक्षा के गुणवत्ता को रखने के लिए साल 2005 से स्कूलों में एनुअल स्टेटस ऑफ एजुकेशन रिपोर्ट यानी कि असर की शुरुआत हुई। इसके तहत शासकीय और निजी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा गुणवत्ता का आंकलन किया जाता है। रायगढ़ जिले में भी 3600 से अधिक शासकीय और निजी स्कूलों का सर्वे किया गया था। इस सर्वे में जो आंकड़े सामने आए हैं वह चिंताजनक है। आंकड़ों के मुताबिक कक्षा तीसरी से पांचवी तक के 43 फ़ीसदी बच्चे दूसरी कक्षा का लेख नहीं पढ़ पा रहे हैं। यह बच्चे जोड़ घटाव में भी कमजोर हैं। कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बच्चों की स्थिति थोड़ी बेहतर पाई गई है लेकिन इस क्लास के 19 फ़ीसदी बच्चे भी रीडिंग में कमजोर हैं। छठवीं से आठवीं तक के ही बच्चे मैथ्स में भी कमजोर पाए गए हैं। आंकड़े सामने आने के बाद शिक्षा गुणवत्ता के दावों की पोल खुल रही है। रिपोर्ट को लेकर शिक्षाविद भी चिंता जाता रहे हैं। हालांकि शिक्षकों का कहना है कि कॉविड के बाद बच्चों में स्कूल जाने की प्रवृत्ति घटी है। ऐसे में शासकीय स्कूलों के बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हुई है। शिक्षाविदों का कहना है की रिपोर्ट चिंताजनक जरूर है लेकिन नए इनोवेशन और टूल किट के जरिए आने वाले समय में शिक्षा गुणवत्ता में सुधार किया जा सकता है।
इधर शिक्षा विभाग के अधिकारी भी आंकड़ों को स्वीकार कर रहेहैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अन्य जिलों की तुलना में रायगढ़ जिले की स्थिति बेहतर है। जिन जिन बिंदुओं में बच्चे कमजोर पाए गए हैं उन बिंदुओं पर फोकस करके शिक्षा गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किया जा रहे हैं।











