रायपुर। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के रायपुर ज़ोनल ऑफिस ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के तत्कालीन कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत 9 अक्टूबर को स्पेशल कोर्ट (PMLA), रायपुर में एक सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की है। ED ने 8 अक्टूबर को रायपुर में 9.06 करोड़ रुपये की कीमत वाली दो अचल संपत्तियों को ज़ब्त करने का प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर भी जारी किया है। उन्हें इस मामले में 11 अगस्त को ED ने गिरफ्तार किया था और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
ED की जांच EOW/ACB, रायपुर द्वारा अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी, कवासी लखमा और अन्य के खिलाफ़ इंडियन पीनल कोड (IPC) और प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज FIR के आधार पर शुरू की गई थी।
जांच से पता चला कि 2019 से 2023 के दौरान एक शराब सिंडिकेट ने आबकारी विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) को नियंत्रित किया और देशी शराब की सप्लाई (भाग A), नकली होलोग्राम वाली सरकारी दुकानों के माध्यम से बिना हिसाब-किताब वाली शराब की बिक्री (भाग B), डिस्टिलर्स से सालाना कमीशन (भाग C) और विदेशी शराब के लिए FL-10A लाइसेंस सिस्टम के माध्यम से अवैध कमीशन से 2,883 करोड़ रुपये से अधिक की अपराध से प्राप्त आय अर्जित की।
राजीव भवन में पहुंचाया जाता था बड़ा हिस्सा
ED की जांच से पता चला है कि सिंडिकेट द्वारा अर्जित नकदी का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ़ पप्पू बंसल द्वारा संभाला जाता था और रामगोपाल अग्रवाल के निर्देश पर रायपुर के शंकर नगर स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यालय, राजीव भवन में पहुंचाया जाता था। यह नगदी सिंडिकेट से जुड़े लोगों द्वारा ले जाई जाती थी और राजीव भवन में रामगोपाल अग्रवाल के अधीन काम करने वाले अकाउंटेंट देवेंद्र दादसेना को सौंपी जाती थी।
9.06 करोड़ के दो फ्लैट अटैच
जांच से पता चला है कि शराब घोटाले से जुड़ा लगभग 860 से 880 करोड़ रुपये का कैश इसी चैनल के ज़रिए पहुंचाया गया था। इसमें से लगभग 72 करोड़ रुपये रामगोपाल अग्रवाल के कंट्रोल में रहे और उनके कहने पर ही रखे गए, इस्तेमाल किए गए या बांटे गए। सिंडिकेट के उस समय के डिजिटल रिकॉर्ड, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और PMLA की धारा 50 के तहत दर्ज बयान इस कैश पहुंचाने के तरीके और उनकी भूमिका की पुष्टि करते हैं। रायपुर के अनुपम नगर और कटोरा तालाब में उनके दो फ्लैट, जिनकी कीमत 9.06 करोड़ रुपये है, उन्हें उतनी ही कीमत की संपत्ति के तौर पर अस्थायी रूप से अटैच (ज़ब्त) किया गया है।
आगे की जांच जारी
इससे पहले, इस मामले में ED ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट (PMLA) में एक प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट और छह सप्लीमेंट्री प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दायर की थीं। साथ ही, पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुण पति त्रिपाठी और चैतन्य बघेल समेत नौ लोगों को गिरफ़्तार किया था और 601.28 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति अटैच, ज़ब्त या फ़्रीज़ की थी। इस नई अटैचमेंट के साथ, कुल रकम लगभग 610.34 करोड़ रुपये हो गई है। अपराध से हुई कमाई के दूसरे फ़ायदा उठाने वालों की पहचान करने की जांच जारी है। आगे की जांच चल रही है।















