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बेंगलुरु में नकली दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब, 4.91 करोड़ की दवाइयां जब्त; ICU में इस्तेमाल होने वाले इंजेक्शन भी शामिल

बेंगलुरु के पास बिदादी में एक फार्महाउस की आड़ में चल रही कथित अवैध दवा फैक्टरी का खुलासा हुआ है। कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने छापेमारी कर करीब 4.91 करोड़ रुपये कीमत की नकली और घटिया दवाइयां जब्त की हैं। जांच में सामने आया कि सस्ती दवाओं को नई शीशियों में भरकर और फर्जी लेबल लगाकर महंगी मल्टीनेशनल कंपनियों की दवाओं के नाम से बेचा जा रहा था। चिंताजनक बात यह है कि जब्त दवाओं में कुछ इंजेक्शन ICU में इस्तेमाल होने वाले भी बताए जा रहे हैं।

अधिकारियों के मुताबिक, इस कार्रवाई में नकली दवाओं के साथ एक्सपायर्ड मेडिसिन, पैकेजिंग सामग्री, इंजेक्शन भरने की मशीनरी और जाली लेबल भी बरामद हुए हैं। विभाग अब इस पूरे नेटवर्क की सप्लाई चेन खंगाल रहा है और यह पता लगाने में जुटा है कि इन दवाओं की आपूर्ति कहां-कहां की गई।

अधिकारियों ने बताया कि 18 अगस्त को मिली एक सूचना के बाद कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों की एक टीम ने यह जांच की। यह कार्रवाई बेंगलुरु दक्षिण जिले के बिदादी स्थित कुरुबाकेरेना हल्ली में एक फार्महाउस में बने परिसर में की गई थी। उन्होंने बताया कि जांच में पता चला कि इस परिसर का इस्तेमाल अन्य राज्यों से कम कीमत वाली दवाइयां मंगाने के लिए किया जा रहा था।

इसके बाद इन दवाइयों को कथित तौर पर नई शीशियों में भरकर और नए लेबल लगाकर महंगी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के ब्रांड और आयातित दवाइयों जैसा दिखाया जाता था। नकली दवाइयां ऐसी जाली या फर्जी दवाइयां होती हैं, जिन्हें असली और नामी ब्रांड की दवाइयों जैसा दिखने के लिए तैयार किया जाता है। इनका उद्देश्य खरीदारों को धोखा देकर मुनाफा कमाना होता है।

कर्नाटक के स्वास्थ्य मंत्री यूटी खादर ने इस ऑपरेशन को ड्रग माफिया का एक बड़ा मामला बताया और कहा कि नकली दवाएं कथित तौर पर अस्पतालों को बाजार भाव से लगभग 50 प्रतिशत कम कीमत पर बेची जा रही थीं। खादर ने कहा कि सबसे चिंताजनक बात यह है कि ज़ब्त की गई कुछ दवाएं कथित तौर पर इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में इस्तेमाल के लिए थीं। आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया है, जबकि रामनगर के पुलिस अधीक्षक ने जांच का जिम्मा संभाल लिया है। अधिकारी अब पूरी सप्लाई चेन की जांच कर रहे हैं, जिसमें वे लोग भी शामिल हैं जिन्होंने बिदादी यूनिट को दवाएं सप्लाई कीं और जिन्होंने उन्हें खरीदा हो सकता है।

कर्नाटक खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग के आयुक्त के. श्रीनिवास द्वारा जारी एक बयान में कहा गया, “इन नकली दवाइयों में कोई सक्रिय औषधीय तत्व नहीं था, उनमें गलत सामग्री अथवा हानिकारक पदार्थ मौजूद थे। इस उद्देश्य से इस्तेमाल किए गए लेबल पर दिए गए स्कैनिंग कोड भी काम नहीं कर रहे थे।” अधिकारियों ने बताया कि औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत नकली दवाइयों से संबंधित प्रावधान धारा 17बी में दिए गए हैं।

वहीं, नकली दवाइयों के निर्माण, बिक्री, भंडारण या वितरण के लिए धारा 27 के तहत कड़ी सजा का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि इस अपराध के लिए न्यूनतम 10 वर्ष के कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। जब्त की गई दवाइयों को बेंगलुरु दक्षिण की स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। जब्त की गई दवाइयों में सेफियाविजेंट 2.5 इंजेक्शन की 5,640 शीशियां, हिजलैम इंजेक्शन की 1,531 शीशियां, जाविटाज इंजेक्शन की 470 शीशियां और एम्ब्लावियो की 264 शीशियां शामिल हैं। इसके अलावा समय-सीमा समाप्त हो चुकी दवाइयां, पैकेजिंग सामग्री, इंजेक्शन भरने की मशीनरी और जाली लेबल भी जब्त किए गए हैं।

विभाग ने बताया कि जब्त की गई सभी सामग्री की कुल अनुमानित कीमत 4,91,49,575 रुपये है। अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में कई गंभीर उल्लंघनों का पता चला है। इनमें औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 का सीधे तौर पर उल्लंघन करते हुए बिना लाइसेंस के दवाइयों का निर्माण, भंडारण और वितरण करना शामिल है।

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