अनफिट गाडियों पर नहीं लगाम, हर दिन हो रहे हादसे
रायगढ़ जिले में बेरोकटोक दौड़ रही ओवरलोड गाडियों ने शहरवासियों की समस्या बढा दी है। जानकर हैरत होगी कि जनवरी से लेकर अब तक जिले की सड़कों में 379 सड़क हादसे दर्ज किए गए हैं जिसमें से 60 फीसदी हादसे भारी और ओवरलोड वाहनों की वजह से हुए हैं। इन हादसों में 81 लोगों की मौतें भी हुई हैं। सब कुछ जानने के बाद भी न तो पुलिस प्रशासन इस दिशा में कारगर कदम उठा है न ही ट्रांसपोर्टर इन गाडियों पर लगाम लगा पा रहे हैं। दरअसल इंडस्ट्रियल हब होने की वजह से रायगढ़ जिले में भारी वाहनों का परिचालन लगातार बढ रहा है। जिले की सडकों से हर दिन अमूमन 6 हजार से अधिक भारी वाहन गुजरते हैं। इसमें से 50 से 60 फीसदी गाडियों में कोल ट्रांसपोर्टेशन होता है। कोयले से लदी ये गाडियां न सिर्फ ओवरलोड होती हैं बल्कि कई गाडियां फिटनेस में भी अनफिट हैं। इन गाडियों की वजह से शहर में आए दिन हादसे हो रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले छह महीने में जिले में 379 सड़क हादसे हुए हैं जिसमें से ज्यादातर हादसे नेशनल हाइवे या फिर रायगढ़ धरमजयगढ़, रायगढ़ खरसिया, रायगढ़ सारंगढ रोड में दर्ज हुए हैं। ज्यादातर हादसे कोयले से लोड ट्रकों व ट्रेलरों से हुए हैं। जांच में ये गाडियां अनफिट भी पाई गई हैं। लोगों का कहना है कि इन सबके बावजूद विभागीय अधिकारियों के द्वारा न तो गाडियों की फिटनेस की जांच की जा रही है न ही ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जा रही है। ऐसे में हादसों का सिलसिला बदस्तूर जारी है। इधर हादसों को लेकर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की अपनी ही दलील है। ट्रांसपोर्टर अजय प्रताप सिंह का कहना है कि जिले की सडकें तकनीकी रूप से खराब है। शहर की सडकों पर गाडियों का लोड काफी बढ चुका है जबकि सड़कों का स्ट्रक्चर बीस से पच्चीस साल पुराना है। ऐसे में हादसे हो रहे हैं। वाहनों पर कार्रवाई की बजाए सडकों को दुरुस्त करने की जरुरत है। इधर मामले में विभागीय अधिकारी भी सफाई दे रहे हैं। डीएसपी ट्रैफिक कि सडकों को दुरुस्त करने के लिए हादसे वाली जगहों का चिन्हांकन किया गया है। शहर की सडकों में लगातार जांच अभियान भी चलाया जा रहा है जिसमें नियम तोडने वालों के साथ ही साथ अनफिट गाडियों पर कार्रवाई की जा रही है। हादसों को कम करने के लिए लगातार जागरुकता अभियान भी चलाया जा रहा है।














