रायगढ़ न्यूज डेस्क। रायगढ़ शहर में तालाबों को सहेजने की योजना धरातल पर नहीं उतर पा रही है। नगर निगम ने योजना के तहत शहर के तालाबों के गहरीकरण और सौंदरीकरण की योजना बनाई थी इसके लिए 20 करोड़ का फंड भी रखा था। निगम ने शहर में दो दर्जन से अधिक तालाबों का चिन्हांकन भी किया था। लेकिन 4 साल बाद भी योजना धरातल पर नहीं उतर पाई। ऐसे में शहर का भू जल स्तर जहां लगातार गिर रहा है तो वहीं प्राइम लोकेशन में स्थित तालाबों की बेशकीमती जमीनें अतिक्रमण का शिकार हो रही हैं।
दरअसल रायगढ़ में तालाब बहुतायत में हैं लेकिन समय के साथ फंड की कमी और देखरेख के अभाव में यह तालाब अपना अस्तित्व खो रहे हैं। कुछ तालाब सूखकर मैदान में तब्दील हो गए हैं तो कुछ तालाबों की बेशकीमती जमीनों पर भू माफिया कब्जा कर रहे हैं। इसे देखते हुए नगर निगम ने शहर के तालाबों के संरक्षण और संवर्धन की योजना बनाई थी। योजना के तहत निगम ने पार्षदों से तालाबों के सौंदर्यीकरण और गहरीकरण का प्रस्ताव मांगा था। पार्षदों ने कुल 21 तालाबों की सूची नगर निगम को सौंपे थी जिनके जीर्णोद्धार की जरूरत है। इसमें कर्बला तालाब भुज प्रधान तालाब, जयसिंह तालाब, केआईटी कैंपस के तलाब शामिल थे। नगर निगम इन तालाबों के लिए ना सिर्फ निगम के बजट में 5 करोड़ का प्रस्ताव किया था बल्कि राज्य शासन से 20 करोड रुपए की राशि भी मांगी थी। लेकिन बाद में नगर निगम इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठा पाया। आलम यह है कि तालाब सूख रहे हैं और उन पर भू माफिया कब्जा कर रहे हैं। लेकिन इन सब के बावजूद नगर निगम मौन है ऐसे में विपक्ष निगम की उदासीनता को लेकर सवाल उठा रही है। बीजेपी का कहना है कि जिस तेजी से शहर का भू जल स्तर गिर रहा है इसे रोकने के लिए तालाबों का संरक्षण और संवर्धन बेहद जरूरी है लेकिन शहर सरकार इस दिशा में गंभीर नहीं है।
इधर मामले में मेयर भी योजना में देरी की बात स्वीकार कर रही हैं। मेयर का कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार में पार्षदों से तलावों के गहरीकरण और सौंदरीकरण का प्रस्ताव मांगा गया था। राज्य शासन को पत्र लिखकर राशि की मांग भी की गई थी लेकिन किसी कारणवश राशि नहीं मिल पाई। नगर निगम की ओर से तालाबों को सहेजने के लिए फिर से प्रयास किया जाएगा।
तालाबों को संवारने की योजना बनाई गई थी। राशि की कमी की वजह से काम नहीं हो पाया। राज्य शासन से राशि की मांग की गई है।
जानकी काटजू मेयर नगर निगम













