गौरी-गौरा, पंथी, पंडवानी, राऊत नाचा, सुवा और कर्मा की प्रस्तुतियों से जीवंत हुई लोक परंपराएं
रायगढ़, 22 सितम्बर 2026/ 41वें अंतर्राष्ट्रीय चक्रधर समारोह की 9वीं सांस्कृतिक संध्या में छत्तीसगढ़ की सुप्रसिद्ध लोक सांस्कृतिक संस्था ‘लहर गंगा’ ने अपनी मनोहारी प्रस्तुति से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति और लोक परंपराओं से रूबरू कराया। संस्था के संचालक एवं निर्देशक श्री पुरानिक साहू के नेतृत्व में कलाकारों ने नृत्य, गीत और संगीत के माध्यम से प्रदेश की लोक विधाओं का आकर्षक मंचन किया।
‘लहर गंगा’ की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ के लोक जीवन के विविध रंग देखने को मिले। कलाकारों ने गौरी-गौरा, जस जंवारा, पंथी, पंडवानी, राऊत नाचा, सुवा, कर्मा और ददरिया जैसी पारंपरिक लोक विधाओं की मनोहारी झलक प्रस्तुत की। अलग-अलग लोक नृत्यों और गीतों के माध्यम से कलाकारों ने छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत, ग्रामीण जीवन और लोक परंपराओं को मंच पर जीवंत कर दिया। ‘लहर गंगा’ की प्रस्तुति में छत्तीसगढ़ की मिट्टी की खुशबू, लोक जीवन की सहजता और पारंपरिक कला की विविधता एक साथ नजर आई। संस्था के कलाकारों ने अपनी ऊर्जा और सधे हुए मंचीय प्रदर्शन से दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं। प्रस्तुति के दौरान छत्तीस दलों वाला पुष्प कमल भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।
बालोद जिले के धनेली स्थित लोक कला ग्राम से जुड़ी ‘लहर गंगा’ लंबे समय से छत्तीसगढ़ की लोक सांस्कृतिक धरोहर को सहेजने और मंचीय स्वरूप में प्रस्तुत करने का कार्य कर रही है। संस्था की प्रस्तुतियां छत्तीसगढ़ के साथ ही महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, मध्यप्रदेश, असम, बिहार और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में हो चुकी हैं।















