न्यूज डेस्क, रायगढ़। गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार से स्कूल खुलने वाले हैं लेकिन शिक्षा विभाग अभी तक जर्जर स्कूलों की मरम्मत नहीं कर पाया है। जानकर हैरत होगी कि जिले के 512 स्कूलों के भवन जर्जर हैं जिनकी मरम्मत अब तक नहीं हो पाई है। ऐसे में बच्चे फिर से बारिश में जर्जर भवनों में पढ़ने को मजबूर होंगे।
दरअसल पिछले शिक्षण सत्र में शिक्षा विभाग में सभी जिलों से जर्जर स्कूल भवनों की सूची मांगी थी। जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत के लिए जतन योजना के तहत फंड देने का वादा भी किया था। जिला शिक्षा विभाग ने रायगढ़ जिले में 105 ऐसे स्कूलों की सूची बनाई थी जिनके भवन पूरी तरह कंडम हो चुके हैं और जिनके नए सिरे से निर्माण की जरूरत है, जबकि 1746 ऐसे स्कूल भवनों का चिन्हांकन किया था जिनकी मरम्मत की जरूरत थी। शिक्षा विभाग से सूची मिलने के बाद राज्य शासन ने जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए 10 करोड रुपए का फंड रिलीज किया था। निर्माण के लिए आरईएस को एजेंसी बनाते हुए 31 मार्च तक स्कूलों की मरम्मत के निर्देश भी दिए थे। लेकिन जानकर हैरत होगी कि जिले में अभी भी आधे स्कूलों की मरम्मत नहीं हो पाई है। जिले के 512 स्कूलों में मरम्मत का काम ही शुरू नहीं हो पाया है जबकि बाकी के स्कूल अभी भी अधूरे और जर्जर अवस्था में हैं। 2 दिन बाद स्कूल खुलने वाले हैं ऐसे में लापरवाही को लेकर कांग्रेस सवाल उठा रही है। कांग्रेस का कहना है कि राज्य सरकार स्कूलों की मरम्मत को लेकर गंभीर नहीं है। अगर समय रहते स्कूलों के मेंटेनेंस का काम शुरू किया जाता तो सत्र शुरू होने के पहले ही स्कूलों की दशा सुधारी जा सकती थी। विभागीय लापरवाही का खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगताना पड़ रहा है और वे फिर से जर्जर भवनों में बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। इधर मामले में शिक्षा विभाग के अधिकारी भी देरी की बात स्वीकार कर रहे हैं। जिला शिक्षा अधिकारी बी बाखला का कहना है स्कूलों की मरम्मत का काम जारी है। जिले में 12 स्कूल पूरी तरह डेड हैं वहां के बच्चों को दूसरे भवनों में पढ़ाने की वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है। निर्माण एजेंसी को भी कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।















