नई दिल्ली. अभिजीत दीपके की अगुवाई वाली CJP यानी कॉकरोच जनता पार्टी की 5 सितंबर की रैली पर सुप्रीम कोर्ट की भी मुहर लग गई है। शीर्ष न्यायालय ने रैली के खिलाफ दाखिल याचिका को खारिज कर दिया है। भारत के मुख्य न्यायाधीश CJI सूर्यकांत के सामने याचिका पेश हुई थी। सीजेपी के आरोप हैं कि सरकार ने जुलाई में किए हुए वादों को पूरा नहीं किया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि ऐसा मानने की मजबूत वजह नहीं है कि कोई अप्रिय घटना होगी। दरअसल, याचिका के जरिए BRICS शिखर सम्मेलन पूरा होने तक प्रस्ताव मार्च को रोकने की मांग की गई थी। खास बात है कि सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित होना है।
क्या बोले सीजेआई सूर्यकांत
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि अधिकारियों से कानून और व्यवस्था बनाए रखने की उम्मीद की जाती है। उन्होंने कहा कि वो सुनिश्चित करें कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और जिम्मेदारी से काम कर रहे हैं और कानून के दायरे में हैं।
क्या है CJP का प्लान
CJP ने ने दिल्ली में पांच सितंबर को विरोध मार्च निकालने का सोमवार को ऐलान किया। पार्टी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 25 जुलाई को किए गए उन वादों को पूरा नहीं किया जिनके आधार पर उसने परीक्षा में गड़बड़ियों के खिलाफ 36 दिन का अपना आंदोलन वापस लिया था। शिक्षक दिवस के मौके पर निकाला जाने वाला यह मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा।
कौन होगा शामिल
CJP ने कहा कि मार्च का नेतृत्व उन छात्रों के परिजन करेंगे, जिन्होंने नीट परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के बाद आत्महत्या कर ली थी। इसके अलावा जुलाई में हुए आंदोलन के दौरान कथित तौर पर पुलिस की ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिजन भी मार्च में शामिल होंगे।
हाल ही में सीजेपी की कार्यसमिति की बैठक हुई थी, जहां यह फैसला लिया गया था। पार्टी ने कहा था, ‘हमारे धैर्य को हमारी कमजोरी नहीं समझा जा सकता। हमारी सद्भावना को सरकार के लिए इस देश के युवाओं के साथ विश्वासघात करने का अवसर नहीं बनने दिया जा सकता।’
हो गई थी हिंसा
CJP का आंदोलन पेपर लीक के मुद्दे को लेकर 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था और बाद में देश के अन्य हिस्सों में भी फैल गया। 20 जुलाई को संगठन के नेतृत्व में संसद की ओर निकाला गया मार्च उस समय अफरातफरी और हिंसा में बदल गया, जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई की। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग घायल हुए।
CJP का आंदोलन 25 जुलाई को उस समय समाप्त हुआ, जब धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। इसके अलावा पार्टी के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के बाद सरकार ने उसकी अन्य मांगों पर भी सहमति जताई। जिनमें आत्महत्या करने वाले नीट अभ्यर्थियों के परिवारों को मुआवजा देना और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी वापस लेना शामिल था।















