नई दिल्ली. उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के अचानक इस्तीफा देने के बाद देश की सियासत में कयासों का दौर जारी है। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से उनके आवास पर जाकर मुलाकात की है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब संसद के दोनों सदन भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे न्यायाधीश यशवंत वर्मा को उनके पद से हटाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने की तैयारी कर रहे हैं।
जस्टिस वर्मा के खिलाफ महाभियोग लाने का नोटिस लोकसभाध्यक्ष को सौंपे जाने के कुछ घंटों बाद, वरिष्ठ मंत्रियों ने सोमवार को संसद परिसर स्थित बिरला के कार्यालय में भी उनसे मुलाकात की थी। तब संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा था कि विभिन्न दलों के 152 सांसदों ने नोटिस पर हस्ताक्षर किए हैं।
राज्यसभा में विपक्ष ने दिया था प्रस्ताव
इसी तरह के एक प्रस्ताव के लिए विपक्ष द्वारा पेश एक नोटिस को राज्यसभा में भी स्वीकार किया गया था। कहा जा रहा है कि सभापति धनखड़ ने विपक्षी दलों के नोटिस को स्वीकार कर उस पर आगे की कार्यवाही के लिए राज्सयभा के महासचिव को निर्देश भी दे दिया था। बड़ी बात यह है कि उस प्रस्ताव पर विपक्ष के सांसदों के दस्तखत थे, एनडीए के सांसदों के नहीं।
धनखड़ से किस बात पर खटपट की चर्चा?
सूत्र बता रहे हैं कि धनखड़ के इसी कदम की वजह से केंद्र सरकार उनसे नाराज हो गई, जिसकी वजह से उनके द्वारा बुलाई गई कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में न तो जेपी नड्डा पहुंचे और न ही संसदीय कार्य मंज्ञी किरेन रिजिजू पहुंचे। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि धनखड़ को इन्हीं राजनीतिक परिस्थितियों की वजह से पद छोड़ना पड़ा। अब महाभियोग प्रस्ताव पर दोनों सदनों के मिलकर काम करने की उम्मीद है।
लोकसभा में पहले आ सकता है महाभियोग प्रस्ताव
हालांकि, सरकारी सूत्रों ने कहा है कि इस प्रस्ताव को निचले सदन में पेश किए जाने की संभावना ज्यादा है। अमित शाह की मुलाकात का मकसद भी यही बताया जा रहा है। सरकार चाहती है कि जस्टिस वर्मा के खिलाफ लोकसभा में महाभियोग पेश कर सरकार के खाते में एक और उपलब्धि अर्जित की जाए।















