Shopping cart

Magazines cover a wide array subjects, including but not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

TnewsTnews
छत्तीसगढ़

रायगढ़- केलो परियोजना की शारदा नहर का होगा कायाकल्प

356 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति जारी
रायपुर, 08 अप्रैल 2026।
छत्तीसगढ़ शासन ने प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने रायगढ़ जिले के विकासखण्ड पुसौर स्थित केलो परियोजना की शारदा वितरक नहर के लाइनिंग कार्य के लिए 356.72 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। इस निर्णय से क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ पहुँचने की उम्मीद है।

सिंचाई की कमी होगी दूर, बढ़ेगा रकबा

अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में शारदा वितरक नहर की जर्जर स्थिति के कारण निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले 740.92 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की कमी हो रही थी। अब नहर के आरडी 0 मीटर से 5000 मीटर तक सीमेंट कंक्रीट लाइनिंग का कार्य होने से कुल 1113.92 हेक्टेयर क्षेत्र में प्रभावी सिंचाई सुनिश्चित होगी। पानी का रिसाव रुकेगा और अंतिम छोर तक पानी पहुँचेगा। कृषि उत्पादन में होगी वृद्धि और किसानों को जल संकट से राहत मिलेगी

सख्त नियमों और समय-सीमा के तहत होगा कार्य

शासन ने इस परियोजना के लिए कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं ताकि काम में पारदर्शिता और गुणवत्ता बनी रहे। गुणवत्ता और निगरानी मुख्य अभियंता को वित्तीय अनुशासन और तकनीकी गुणवत्ता की सतत निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। निविदा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक रखने के निर्देश दिए गए हैं और कार्य को निर्धारित समय के भीतर पूरा करना होगा। अनावश्यक देरी होने पर संबंधित एजेंसी पर अर्थदंड लगाया जाएगा।

किसानों को रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए मिलेगा पानी

राज्य शासन का स्पष्ट निर्देश है कि निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ड्राइंग, डिजाइन और कम से कम 75 प्रतिशत बाधारहित भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इस लाइनिंग कार्य के पूरा होने के बाद पुसौर क्षेत्र के किसानों के लिए रबी और खरीफ दोनों फसलों के लिए पानी की उपलब्धता आसान हो जाएगी, जो क्षेत्रीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बूस्ट साबित होगा। मुख्य अभियंता को छत्तीसगढ़ वित्तीय संहिता के प्रावधानों के अनुसार कार्य की सतत निगरानी एवं वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करने का दायित्व सौंपा गया है। साथ ही कार्य के तकनीकी पहलुओं, गुणवत्ता, प्राक्कलन की सटीकता, कार्यस्थल की उपयुक्तता एवं समयबद्ध पूर्णता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि योजना को लोकहित की मूल भावना के अनुरूप प्रभावी ढंग से क्रियान्वित किया जा सके और क्षेत्र के किसानों को अधिकतम लाभ प्राप्त हो।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts