ईरान युद्ध का अब घातक स्वरूप देखने को मिलने लगा है। शुक्रवार को ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) के पास एक और अमेरिकी विमान A-10 थंडरबोल्ट को मार गिराया। एक सप्ताह के भीतर यह दूसरा मौका है जब ईरान ने अमेरिकी वायुसेना के अत्याधुनिक विमान को निशाना बनाया है। इससे पहले ईरान ने एक F-15 फाइटर जेट को भी मार गिराया था। आपको बता दें कि हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि अमेरिकी हमलों में ईरान पूरी तरह से तबाह हो चुका है।
अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि ईरान की सेना ने हमले की जिम्मेदारी ली है। रिपोर्ट के अनुसार, विमान पर हमले के बाद पायलट किसी तरह कुवैती हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने में सफल रहा और वहां विमान से सुरक्षित बाहर निकल गया। विमान कुवैत की सीमा में दुर्घटनाग्रस्त हुआ है और पायलट सुरक्षित बताया जा रहा है।
ईरानी सेना ने अल जजीरा के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है। यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका पहले से ही अपने लापता चालक दल के सदस्यों के लिए खोज और बचाव अभियान चला रहा था।
ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर को बनाया निशाना
ईरान की आक्रामकता केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं रही। बचाव अभियान में जुटे दो UH-60 ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टरों पर भी हमला किया। हालांकि, इस हमले में कुछ सदस्यों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर सभी को सुरक्षित बताया गया है। इससे पहले मार गिराए गए F-15 जेट के दो चालक दल के सदस्यों में से अब तक केवल एक को ही बचाया जा सका है।
राष्ट्रपति ट्रंप बोले- यह युद्ध है
विमानों के मार गिराए जाने के बाद पहली बार प्रतिक्रिया देते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे युद्ध की स्थिति करार दिया। एनबीसी न्यूज के साथ एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि क्या इन घटनाओं का ईरान के साथ चल रही कूटनीतिक बातचीत पर कोई असर पड़ेगा, तो उन्होंने दोटूक लहजे में कहा, “नहीं, बिल्कुल नहीं। यह युद्ध है। हम एक युद्ध में हैं।”
आपको बता दें कि ईरान द्वारा अमेरिकी विमानों को निशाना बनाने की यह घटना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हो रही है। इस मार्ग के बंद होने और लगातार हमलों से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी अनिश्चितता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति और भी गंभीर हो गई है। भारत अपनी एलपीजी (LPG) और तेल के लिए इस मार्ग पर निर्भर है।















