Shopping cart

Magazines cover a wide array subjects, including but not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

TnewsTnews
  • Home
  • छत्तीसगढ़
  • अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना ने बदल दी अभिषेक-बबीता की ज़िंदगी, सामाजिक समरसता की ओर बढ़ाया मजबूत कदम
छत्तीसगढ़

अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना ने बदल दी अभिषेक-बबीता की ज़िंदगी, सामाजिक समरसता की ओर बढ़ाया मजबूत कदम

रायपुर, 04 जनवरी 2026. सामाजिक सद्भाव, समानता और जाति-पाति के भेदभाव को समाप्त करने की दिशा में सरकार द्वारा संचालित अंतर्जातीय विवाह प्रोत्साहन योजना आज वास्तविक सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। इसी कड़ी में कोरबा जिले के युवा दम्पत्ति अभिषेक आदिले और बबीता देवांगन की कहानी समाज में नई उम्मीद और सकारात्मक बदलाव का संदेश देती है।

कोरबा के आदिले चौक, पुरानी बस्ती के निवासी अभिषेक आदिले हैं और जो अनुसूचित जाति समुदाय से आते हैं, तथा जांजगीर-चांपा जिले के ग्राम चोरिया, तहसील सारागांव की रहने वाली 20 वर्षीया बबीता देवांगन, जो अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय से हैं, ने सामाजिक बाधाओं को दूर करते हुए अंतर्जातीय विवाह किया। दोनों परिवारों ने इस रिश्ते का सम्मान किया और समाज में एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।

अंतर्जातीय विवाह करने वाले दम्पत्तियों को प्रोत्साहित करने हेतु केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना के अंतर्गत इस दम्पत्ति को कुल 2.50 लाख रुपए की प्रोत्साहन राशि स्वीकृत की गई। सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, कोरबा द्वारा इस राशि में से 1.00 लाख रुपए दम्पत्ति के संयुक्त बैंक खाते में प्रदान कर दिए गए हैं, जबकि शेष 1.50 लाख रुपए उनके उज्ज्वल एवं सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए तीन वर्ष की सावधि जमा के रूप में निवेश किए गए हैं। यह आर्थिक सहायता उनके नए जीवन की शुरुआत को सरल बनाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर और सशक्त बनने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

केंद्र सरकार और छत्तीसगढ़ राज्य सरकार दोनों ही सामाजिक समरसता को मजबूत करने, जातीय भेदभाव को समाप्त करने और युवाओं को रूढ़िवादी सोच से मुक्त कर समानता के मार्ग पर अग्रसर करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। शासन द्वारा संचालित यह योजना समाज को अधिक संवेदनशील, एकजुट और प्रगतिशील बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देती है। यह सिर्फ आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक एकता का संदेश भी है, जिससे प्रेम, सम्मान और समानता की भावना को बल मिलता है।

अभिषेक और बबीता की यह पहल केवल एक विवाह का संस्कार नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की नींव है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि यदि विश्वास और साहस हो तो जाति-पाति की दीवारें स्वयं ढह जाती हैं और मानवीय मूल्य ही समाज की असली पहचान बनते हैं। शासन की योजना से मिली सहायता ने उनकी नई यात्रा को सुरक्षित और स्थिर बनाया, जबकि उनकी आपसी समझ और दृढ़ता इस कहानी को और अधिक प्रेरक बनाती है।

चार साल पहले शादी के बंधन में बंधे अभिषेक–बबीता की सफलता से स्पष्ट होता है कि सरकारी योजनाएँ तभी सार्थक होती हैं जब समाज के लोग उन्हें अपनाकर सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts