Shopping cart

Magazines cover a wide array subjects, including but not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

TnewsTnews
  • Home
  • छत्तीसगढ़
  • छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में वानिकी कार्यों से राजस्व वृद्धि : वनांचल नविासी स्थानीय रोजगार सृजन
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम द्वारा माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में वानिकी कार्यों से राजस्व वृद्धि : वनांचल नविासी स्थानीय रोजगार सृजन

रायपुर, 07 जनवरी 2026. वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री के निर्देशानुसार छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम माओवाद प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों में वानिकी कार्यों के माध्यम से न केवल राजस्व बढ़ा रहा है, बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराकर उनके सामाजिक-आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।

कांकेर जिले के अंतागढ़ परियोजना मंडल अंतर्गत कोयलीबेडा, अंतागढ़, दुर्गुकोंदल, मन्हाकाल जैसे अति संवेदनशील क्षेत्रों में सागौन विरलन (थिनिंग), विदोहन और वृक्षारोपण के कार्य सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं। विगत वर्ष इन क्षेत्रों से कुल 4,624.358 घन मीटर काष्ठ और जलाऊ लकड़ी का उत्पादन किया गया, जिससे निगम की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इन कार्यों से बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है, जिससे पलायन में कमी आई है और जीवन स्तर में सुधार हुआ है।

औद्योगिक वृक्षारोपण मंडल जगदलपुर द्वारा बस्तर संभाग के कोण्डागांव और फरसगांव जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में वृक्षारोपण और विदोहन कार्यों के माध्यम से ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है। वर्ष 2024 में लगभग 1,000 घन मीटर वनोपज का उत्पादन किया गया। इसके साथ ही 94 हेक्टेयर क्षेत्र में 2 लाख 35 हजार सागौन पौधों का रोपण किया गया। वर्ष 2025 में अतिक्रमण मुक्त कराए गए वन क्षेत्रों में 76 हेक्टेयर में 1 लाख 90 हजार सागौन और 38 हेक्टेयर में 95 हजार नीलगिरी पौधों का रोपण किया गया है।

सुरक्षा कैंपों की स्थापना से दुर्गम क्षेत्रों में आवागमन आसान हुआ है, जिससे वानिकी कार्यों में तेजी आई है। जहाँ पहले हिंसा और भय का माहौल था, वहाँ अब रोजगार, विकास और हरियाली का संदेश फैल रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम का यह प्रयास माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने, रोजगार बढ़ाने और जंगलों के संरक्षण के साथ आर्थिक समृद्धि लाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts