भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच गुरुवार को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर हुई ऐतिहासिक सहमति के बाद, भारत में प्रीमियम स्कॉच व्हिस्की और जिन जैसे इंपोर्टेड अल्कोहलिक ब्रांड्स अब काफी सस्ते हो जाएंगे। इससे ना केवल स्कॉच लवर्स को बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि शराब व्यापार से जुड़े सेक्टर में भी नई ऊर्जा आएगी।
150% से घटकर 75% हुई इंपोर्ट ड्यूटी
वर्तमान में भारत स्कॉच व्हिस्की जैसी इंपोर्टेड प्रीमियम शराब पर 150% तक इंपोर्ट ड्यूटी वसूलता है, जिससे इनकी कीमतें आम उपभोक्ता की पहुंच से बाहर होती हैं। FTA के बाद इस शुल्क को घटाकर 75% कर दिया गया है और अगले 10 वर्षों में इसे और घटाकर 40% तक लाने की योजना है।
इस समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाले अन्य अल्कोहल ब्रांड्स पर भी यही टैक्स कटौती लागू होगी।
भारत में स्कॉच के प्रमुख ब्रांड्स जैसे:
Johnnie Walker (Red, Black, Double Black, Green, Gold, Blue Label)
Chivas Regal
Glenfiddich
Talisker
The Singleton
Glenmorangie
Jura
Grant’s
अब इन ब्रांड्स की कीमतों में संभावित रूप से 15-30% तक की गिरावट देखने को मिल सकती है, खासकर मेट्रो शहरों में, जहां इनकी खपत अधिक है।
कीमतों पर अनुमानित असर (FTA के बाद):
व्हिस्की वैरिएंट मौजूदा कीमत (750ml) अनुमानित कीमत (FTA प्रभाव के बाद)
Red Label ₹1,450 – ₹1,600 ₹1,100 – ₹1,250
Black Label ₹2,800 – ₹3,000 ₹2,100 – ₹2,400
Green Label ₹5,200 – ₹5,500 ₹3,800 – ₹4,300
Gold Label ₹6,500 – ₹7,200 ₹4,800 – ₹5,600
Blue Label ₹18,000 – ₹22,000 ₹13,000 – ₹17,000
(नोट: कीमतें राज्यों के टैक्स स्ट्रक्चर के आधार पर अलग-अलग हो सकती हैं।)
यह समझौता सिर्फ शराब तक सीमित नहीं
FTA का दायरा सिर्फ शराब या व्हिस्की तक सीमित नहीं है। भारत से UK को होने वाले निर्यात पर भी शुल्क कम किया गया है, जिससे भारतीय उद्योगों को बड़ा लाभ होगा।
ब्रिटेन द्वारा हटाई गईं ड्यूटीज़:
सी फूड्स / मरीन प्रोडक्ट्स:
झींगा, फिश मील, एक्वा फीड्स पर 20% ड्यूटी → 0%
केमिकल्स:
कई प्रकार के औद्योगिक केमिकल्स पर 8% ड्यूटी हटाई गई
टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स:
12% ड्यूटी समाप्त
इससे भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बढ़त मिलेगी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी बल मिलेगा।
FTA का आर्थिक असर क्या होगा?
भारत में अल्कोहल सेक्टर का वैल्यू 2023 में ₹2.9 लाख करोड़ से अधिक था, जो अब FTA के बाद और बढ़ सकता है।
ब्रिटिश सरकार को अपने प्रीमियम ब्रांड्स के लिए बड़ा ग्राहक आधार मिलेगा।
भारतीय उपभोक्ता को किफायती कीमत पर प्रीमियम क्वालिटी मिलेगी।















