गाड़ियों की होगी जियो टैगिंग। वित्त मंत्री ओपी चौधरी के निर्देश
उद्योगों से निकलने वाले फ्लाई ऐश की यहां वहां डंप करने की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद अब राज्य शासन सख्ती की तैयारी में है। उद्योगों से फ्लाई ऐश लेकर निकलने वाले वाहनों की अब ऑनलाइन मॉनिटरिंग होगी। गाड़ियों को जीपीएस सिस्टम और जियो टैगिंग से लैस किए लगाए जाएंगे जिसकी ऑनलाइन ट्रैकिंग की जाएगी। प्रदेश भर में 15 अप्रैल से यह सिस्टम अनिवार्य तौर पर लागू हो जाएगा। राज्य शासन का दावा है कि इससे फ्लाई ऐश की ट्रांसपोर्टिंग करने वाले वाहनों पर लगाम लगाई जा सकेगी और प्रदूषण पर काफी हद तक रोक लगेगी।
दरअसल पावर प्लांट से निकलने वाले फ्लाई ऐश को सीमेंट और ब्रिक्स प्लांट के साथ-साथ सड़कों के निर्माण में यूज करने के निर्देश केंद्र सरकार ने दिए हैं। ऐसे में उद्योगों से बड़े पैमाने पर गाड़ियों में लोड होकर फ्लाई ऐश निकलता है लेकिन ट्रांसपोर्टर फेरे बचाने के चक्कर में फ्लाई ऐश को जंगलों में या खुली जगह पर अवैध तरीके से डंप करते हैं। रायगढ़ जिले में फ्लाई ऐश के अवैध डंप की भी लगातार शिकायतें मिलती रही है। ऐसे में आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय ने फ्लाई ऐश परिवहन की मॉनिटरिंग की तैयारी की है। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा है कि प्रदेश भर में फ्लाई ऐश परिवहन करने वाले वाहनों की अब जियो टैगिंग होगी। फ्लाई ऐश का परिवहन करने वाली गाड़ियां जीपीएस से लैस होगी। पावर प्लांट से निकलने के बाद गाड़ियां गंतव्य तक पहुंची है या नहीं इसकी ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी। नींबू की अवहेलना करने पर जुर्माने की कार्रवाई भी कीजाएगी। प्रदेश भर में 15 अप्रैल से यह नियम लागू हो जाएगा।
आपको बता दे की रायगढ़ जिले में फ्लाई ऐश का निस्तारण एक बड़ी समस्या है। जिले के पावर प्लांट से हर साल लगभग एक करोड़ 80 लाख मैट्रिक टन फ्लाई ऐश का उत्सर्जन हो रहा है। जिले में इसमें से सिर्फ 49 फ़ीसदी फ्लाई ऐश का निष्पादन ही हो रहा है जबकि बाकी के फ्लाई ऐश परिवहन कर दीगर जिलों में भेजे जा रहे हैं। ऐसे में गाड़ियों से सड़कों के किनारे अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग की लगातार शिकायतें मिलती रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि राज्य शासन के इस निर्देश से फ्लाई ऐश के अवैध परिवहन और भंडारण पर रोक लगा सकेगी। लेकिन शासन को इस नियम का कड़ाई से पालन करना सुनिश्चित करना होगा।















