Shopping cart

Magazines cover a wide array subjects, including but not limited to fashion, lifestyle, health, politics, business, Entertainment, sports, science,

TnewsTnews
  • Home
  • छत्तीसगढ़
  • वनांचल के युवाओं का पराक्रम: शंकरगढ़ के 11 युवा बने अग्निवीर
छत्तीसगढ़

वनांचल के युवाओं का पराक्रम: शंकरगढ़ के 11 युवा बने अग्निवीर

सीमित संसाधनों के बीच रचा सफलता का इतिहास, श्री अरविंद यादव का भारतीय सेना की स्पेशल फोर्स में चयन

रायपुर , 19 जून 2026. छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्र शंकरगढ़ के युवाओं ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के सामने संसाधनों की कमी कोई मायने नहीं रखती। बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के शंकरगढ़ विकासखंड के 11 युवाओं का भारतीय सेना की अग्निवीर भर्ती में चयन हुआ है। इनमें ग्राम जोकापाठ निवासी श्री अरविंद यादव का चयन भारतीय सेना की प्रतिष्ठित स्पेशल फोर्स ‘पैरा कमांडो’ में हुआ है। वे जिले से इस गौरवशाली इकाई में चयनित होने वाले पहले युवा बन गए हैं।

वनांचल और ग्रामीण परिवेश से निकलकर इन युवाओं ने कठिन परिस्थितियों, सीमित सुविधाओं और संसाधनों के अभाव के बावजूद अपनी मेहनत, अनुशासन और देशसेवा के जज्बे के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। उनकी सफलता पूरे सरगुजा संभाग के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।

हाल ही में चयनित युवा अपने प्रशिक्षकों के साथ कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी से मिले। कलेक्टर ने सभी युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि क्षेत्र के युवाओं में असीम संभावनाएं हैं। यदि उन्हें सही दिशा, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन मिले तो वे राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान स्थापित कर सकते हैं। उन्होंने युवाओं से अपने गांव और आसपास के अन्य युवाओं को भी सेना तथा अन्य प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

इस उपलब्धि के पीछे अतिथि शिक्षक श्री सुदर्शन यादव और एक सेवानिवृत्त सैनिक का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। दोनों ने युवाओं को भर्ती प्रक्रिया की जानकारी देने, शारीरिक दक्षता विकसित करने और लिखित परीक्षा की तैयारी कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन और युवाओं की अथक मेहनत का परिणाम आज पूरे जिले के सामने प्रेरक उदाहरण के रूप में है।

विशेष रूप से श्री अरविंद यादव की सफलता ने इस उपलब्धि को और भी खास बना दिया है। श्री अरविंद बताते हैं कि सेना में भर्ती होकर देश सेवा करना उनका बचपन का सपना था। वर्षों की कड़ी मेहनत, नियमित अभ्यास और परिवार व प्रशिक्षकों के सहयोग ने उन्हें भारतीय सेना की सबसे चुनौतीपूर्ण और प्रतिष्ठित इकाइयों में स्थान दिलाया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Posts