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नेपाल में कानून व्यवस्था फेल, जेल से भागे 1432 कैदी; राष्ट्रपति बोले- आइये बात करते हैं

काठमांडू. नेपाल में भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के बाद युवाओं में बढ़े आक्रोश, उग्र प्रदर्शनों और हिंसा की घटनाओं के बीच देश की विभिन्न जेलों से लगभग 1432 कैदी फरार हो गए। कांतिपुर समाचार पत्र ने अपने एक्स हैंडल पर यह जानकारी साझा की। इसमें बताया गया कि महोतारी के जलेश्वर में जेल की दीवार तोड़कर 572 कैदी भाग निकले। नेपाल में कानून व्यवस्था के बिगड़े हालात का फायदा उठाकर कैदियों ने जेल से भागने में सफलता हासिल की।

सोलुखुम्बु जेल में आगजनी और तोड़फोड़
महोत्तरी के पुलिस अधीक्षक हेरम्बा शर्मा ने बताया कि शाम सात बजे 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों और जेल में बंद कैदियों ने मिलकर दीवार तोड़ी, जिसके बाद स्थिति अनियंत्रित हो गई। सोलुखुम्बु जेल में कैदियों ने आगजनी और तोड़फोड़ की, जिसमें 86 कैदी फरार हो गए। पुलिस उपाधीक्षक मनोजीत कुंवर के अनुसार, दोपहर में शुरू हुआ कैदियों का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया और शाम तक वे जेल में तोड़फोड़ कर भागने में सफल रहे।

वहीं, तुलसीपुर जेल से 124 कैदी जेल तोड़कर फरार हो गए। जेल प्रमुख बीर बहादुर सेजुवाल ने बताया कि एक ब्लॉक में बंद 179 कैदियों में से 124 भाग निकले, जबकि 55 अभी भी जेल में हैं। कैलाली जेल के सभी 650 कैदियों के भी भागने की खबरें हैं।

नेपाल में दो दिनों से उग्र प्रदर्शन
पिछले दो दिनों से नेपाल के कई इलाकों में तोड़फोड़, पथराव और आगजनी की घटनाएं सामने आई हैं। उग्र भीड़ ने कई सरकारी इमारतों को आग के हवाले कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय सिंह दरबार, संघीय संसद, सर्वोच्च न्यायालय, विशेष न्यायालय, महान्यायवादी कार्यालय और शीर्ष राजनीतिक नेताओं के घरों व कार्यालयों में आगजनी और तोड़फोड़ की। इस बीच, राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रदर्शनकारियों से हिंसा छोड़कर बातचीत के लिए आगे आने की अपील की है। उनके निजी सचिव ने बताया कि राष्ट्रपति ने सभी पक्षों से संवाद का आग्रह किया है।

शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आह्वान
प्रशासन और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना और घायलों के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए एक संयुक्त अपील जारी की। इसमें कहा गया कि प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है। इसलिए, सभी नागरिकों से शांति बनाए रखने और जान-माल को और नुकसान से बचाने की अपील की गई है। साथ ही सभी पक्षों से राजनीतिक बातचीत के जरिए शीघ्र और शांतिपूर्ण समाधान निकालने का आह्वान किया गया।

कांतिपुर समाचार पत्र के अनुसार, इस अपील पर नेपाल सरकार के मुख्य सचिव एकनारायण आर्यल, सेनाध्यक्ष अशोक राज सिगदेल, गृह सचिव गोकर्णमणि दुवादी और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। इन अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि स्थिति को स्थिर करने और आगे किसी भी हताहत या संपत्ति के नुकसान को रोकने के लिए नागरिकों का सहयोग और सभी पक्षों का संयम बेहद जरूरी है।

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