लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को दावा किया कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कई बार मिल चुके हैं और उनमें कोई दम नहीं है। उन्होंने कांग्रेस ‘ओबसी भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में यह टिप्पणी की।
बस ‘शो’ हैं, कोई दम नहीं है- राहुल गांधी
राहुल गांधी ने अपने भाषण के दौरान जब यह सवाल किया कि देश में सबसे बड़ी समस्या क्या हैं तो वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने प्रधानमंत्री का नाम लिया। इस पर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘नरेन्द्र मोदी कोई बड़ी समस्या नहीं हैं। मीडिया वालों ने सिर्फ गुब्बारा बना रखा है। मैं उनसे मिल चुका हूं, उनके साथ कमरे में बैठा हूं। बस ‘शो’ हैं, कोई दम नहीं है।” उन्होंने कहा, ‘‘21वीं सदी ‘डेटा’ की सदी है। मोदी जी डेटा के बारे में बोलते रहते हैं। पहले जिस देश के पास तेल होता था, उसे शक्तिशाली माना जाता था। आज का तेल डेटा है।’’
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि उनकी पार्टी के सत्ता में रहने के दौरान जाति जनगणना नहीं कराना उनकी व्यक्तिगत गलती थी, जिसे अब सुधारने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह मुद्दा देश की राजनीति में ‘भूकंप’ लाने वाला साबित हुआ है, जिसने राजनीतिक परिदृश्य को हिला दिया है।
‘जब मैं अपना मूल्यांकन करता हूं, तो…’
राहुल गांधी ने ‘ओबीसी भागीदारी न्याय सम्मेलन’ में कहा, “मैं 2004 से राजनीति में हूं। जब मैं अपना मूल्यांकन करता हूं, तो कई जगह अच्छा किया, कई जगह कमियां भी रहीं। आदिवासियों, दलितों और अल्पसंख्यकों के मुद्दों पर मुझे अच्छे नंबर मिलते हैं, महिलाओं के मुद्दों पर भी ठीक हूं। लेकिन जब मैं पीछे देखता हूं तो एक कमी साफ नजर आती है—ओबीसी वर्ग के हितों की रक्षा जिस तरह करनी थी, वो मैं नहीं कर पाया।” उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय ओबीसी समुदाय की समस्याओं और इतिहास को गहराई से समझ नहीं पाया।
कांग्रेस नेता आगे बोले “दलितों की कठिनाइयों को समझना आसान है, आदिवासियों की समस्याएं भी स्पष्ट दिखती हैं, लेकिन ओबीसी की मुश्किलें हमेशा सामने नहीं आतीं। अगर मुझे आपके मुद्दों का उतना ज्ञान तब होता, तो मैं सत्ता में रहते ही जाति जनगणना कराता। वह समय निकल गया, यह कांग्रेस की नहीं बल्कि मेरी गलती है।” राहुल गांधी ने यह भी कहा कि अब उनकी प्राथमिकता इस गलती को सुधारना है और जाति जनगणना को पूरा कराना उनका संकल्प है।















