हैदराबाद: भारत की ओर से इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में जाने वाले पहले एस्ट्रोनॉट शुभांशु शुक्ला और उनकी Axiom-4 Mission की टीम अंतरिक्ष से सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर लैंड कर चुके हैं. Axiom-4 Mission का ड्रैगन ग्रेस स्पेसक्राफ्ट ने अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैन डिएगो के समुद्री तट पर सुरक्षित रूप से लैंड किया. आसमान से समुद्री तट पर उतरने की प्रक्रिया में 5.7 किलोमीटर की ऊंचाई पर ड्रोग पैराशूट को स्टेब्लिश किया गया. उसके बाद लगभग 2 किलोमीटर की ऊंचाई पर मेन पैराशूट्स को खोला गया और उसके कुछ ही मिनट के बाद स्पेसएक्स के स्पेसक्राफ्ट ने समुद्र में लैंड किया. इस क्रू में मिशन पायलट Peggy Whitson, मिशन स्पेशलिस्ट्स – पोलैंड की Slawosz Uznanski-Wisniewski और हंगरी की Tibor Kapu शामिल हैं, जो अपने-अपने स्पेस सूट्स के साथ ड्रगैन स्पेसक्राफ्ट में बैठकर धरती पर आएं हैं.
पृथ्वी पर लौटे शुभांशु शुक्ला
स्पेसएक्स ने अपने आधिकारिक एक्स (पुराना नाम ट्विटर) पर इस बात को पुष्टि करते हुए लिखा कि, ड्रैगन स्पलैशडाउन कंफर्म हो चुका है. इसके साथ स्पेसएक्स ने शुभांशु शुक्ला समेत सभी चारों एस्ट्रोनॉट्स पर पृथ्वी पर स्वागत किया.
शुभांशु शुक्ला और उनके इस मिशन के क्रू-मेंबर्स ने अंतरिक्ष में मौजूद इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 18 दिन बिताए और उसके बाद 14 जून की भारतीय समयानुसार 2:50 PM पर स्पेसक्राफ्ट का हैच बंद हुआ और करीब 4:45 PM IST पर ड्रैगन ग्रेस स्पेसक्राफ्ट ने स्पेस स्टेशन से सफलतापूर्वक अनडॉक किया और उसके बाद पृथ्वी की ओर लौटने वाली यात्री शुरू की.
स्पेस स्टेशन से दूर जाने के बाद ड्रैगन कैप्शूल नाम का स्पेसक्राफ्ट कई डिपार्चर बर्न्स करेगा और पहला बर्न हुआ और उसके बाद कई बार बर्न्स हुए. उसके बाद कई प्रोसेस को पूरा किया गया और स्पेसक्राफ्ट ने सफलतापूर्वर और सुरक्षित रूप से मिशन को पूरा करते हुए पृथ्वी पर वापसी की. इस यात्रा के दौरान किए गए सभी प्रोसेस डिटेल्स नीचे बनी टेबल में दी गई है.
पीएम मोदी ने किया स्वागत
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (पुराना नाम ट्विटर) पर पोस्ट करके लिखा, “मैं भी राष्ट्र के साथ जुड़कर ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला का स्वागत करता हूँ, जो अपने ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन से पृथ्वी पर लौटे हैं. अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचने वाले भारत के पहले अंतरिक्ष यात्री के रूप में, उन्होंने अपने समर्पण, साहस और नवाचार की भावना से अरबों सपनों को प्रेरित किया है. यह उपलब्धि हमारे मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन – गगनयान की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है.”















