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छत्तीसगढ़

कारीछापर कोल साइडिंग में चल रहा मिक्सिंग का खेल, करोड़ों की हेराफेरी

कारोबारी कोयले में मिला रहे छाई,
अवैध तरीके से प्लांट्स में भेजा जा रहा कोयला

न्यूज डेस्क, रायगढ़। जिले के कारीछापर साइडिंग में कोयले की अफरा तफरी का बड़ा खेल चल रहा है। कोयला कारोबारियों द्वारा कोयले में चारकोल मिलाकर रेलवे वैगनों के जरिए भेजा जा रहा है। कोल कारोबारी चारकोल या आम भाषा में कहें तो कोयले की छाई को कोल साइडिंग में डंप कर रहे हैं। फिर उसे कोयले में मिलाकर वैगन के जरिए प्लांट में भेजा जा रहा है। वैगन के ऊपरी हिस्से में कोयला और नीचे छाई लोड किया जा रहा है। इससे न सिर्फ वजन अधिक हो रहा है बल्कि प्लांट में जांच के दौरान भी कोयला ही नजर आता है। खबर यह भी है कि साइडिंग से कोयले को बिना वैध चालान के स्थानीय प्लांट्स में पहुंचाया जा रहा है।

कैसे हो रही है कोयले की हेराफेरी?

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कोयला कारोबारी साइडिंग कर्मियों की सांठगांठ से बिना कोयला उतारे ही पेपर रसीद ले लेते हैं। इसके बाद अवैध तरीके से कोयले को साइडिंग या प्लांट्स में भेजा जाता है। जितना कोयला बिना गिराए प्लांट में भेजा जाता है, उसके बराबर वजन चारकोल मिला दिया जाता है, ताकि वजन का हिसाब मिलता रहे।

प्रशासन और रेलवे प्रशासन की मिलीभगत का आरोप

इस पूरे मामले में साइडिंग कर्मचारियों और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के संकेत मिल रहे हैं। अवैध कोयले की ढुलाई और चारकोल की मिलावट धड़ल्ले से जारी है, लेकिन अभी तक कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने इस मामले की जांच की मांग की है, ताकि कोल माफियाओं पर अंकुश लगाया जा सके। जानकर बताई हैं कि अगर यह धंधा जारी रहा, तो सरकार को करोड़ों का राजस्व नुकसान होगा और गुणवत्ताहीन कोयले के इस्तेमाल से उद्योगों को भी चपत लगेगी। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से तत्काल इस मामले की जांच क दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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