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छत्तीसगढ़

दूर नहीं हो रही ब्लैक स्पॉट्स की खामियां

हर दिन हो रहे सड़क हादसे, सड़कों की तकनीकी खामियां दूर करने की थी योजना, दो साल से अधर में लटकी।


एंकर रायगढ़ जिले में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने ब्लैक स्पॉट्स का चिंहांकन कर सड़कों की तकनीकी खामियां दूर करने की योजना बनाई थी। इसके लिए सड़कों का सर्वे भी किया गया था। लेकिन जानकर हैरत होगी की 2 सालों बाद भी योजना पर अमल नहीं हो पाया है। ब्लैक स्पॉट्स चिन्हित तो कर लिए गए हैं लेकिन उन्हें अब तक दुरुस्त नहीं किया जा सका है। आलम यह है कि हर दिन हादसे हो रहे हैं और बेगुनाहों की जाने जा रही है लेकिन शासन प्रशासन मौन है।

दरअसल रायगढ़ जिले की सड़कों में भारी वाहनों की आवाजाही की वजह से ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में न सिर्फ आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं बल्कि लोगों की जाने भी जा रही है। जानकर हैरत होगी की एक जनवरी से लेकर 31 मार्च तक पिछले 3 महीने में 175 सड़क हादसे हो चुके हैं जिसमें 73 लोगों की जाने जा चुकी है। लेकिन इन सब के बावजूद हादसों को रोकने के लिए कोई ठोस कार्य योजना नहीं बन पाई है। बीते साल सड़क सुरक्षा समिति ने जिले में सबसे अधिक हादसों वाली जगहों को ब्लैक स्पॉट्स के रूप में चिन्हांकित कर सड़कों की तकनीकी खामियों को दूर करने का सुझाव दिया था। इसके लिए जॉइंट कमेटी भी बनी थी जिसने सड़कों का सर्वे किया था। सर्वे के बाद 17 ऐसी जगह का चिंहांकन किया गया था जहां सबसे अधिक हादसे होते हैं। इसमें पहाड़ मंदिर रोड, उर्दना तिराहा, लाखा रोड, 18 नाला, गेरवानी मोड, छातामुडा बाईपास जैसे स्पॉट्स शामिल थे। सड़क सुरक्षा समिति ने इन सभी भारत की तकनीकी खामियों को दूर करने, सड़कों को नए सिरे से बनाने और संकेतक बोर्ड लगाने के सुझाव दिए थे। लेकिन साल भर बीत जाने के बाद भी इन सुझावों पर अमल नहीं लाया जा सका है। नतीजन इन्हीं इलाकों में सबसे अधिक हादसे होरहे हैं। ऐसे में मामले को लेकर स्थानीय लोग जिला प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। लोगों का कहना है कि अगर ब्लैक स्पॉट्स की तकनीकी खामियों को ठीक कर दिया जाए तो हादसों में काफी हद तक कमी लाई जा सकेगी।
इधर मामले में अधिकारी हादसों को रोकने लगातार प्रयास करने का दावा कर रहे हैं। एसपी का कहना है कि दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों की पहचान की गई है। ऐसे इलाकों में संकेतक बोर्ड लगाए जा रहे हैं। जिन इलाकों में तकनीकी त्रुटियां हैं उसे ठीक किया जा रहा है। लोगों में अवेयरनेस की कमी की वजह से हादसे हो रहे हैं। आने वाले समय में हादसों में कमी आएगी।

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