रायगढ़ न्यूज डेस्क। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मिली शानदार सफलता के बाद अब भाजपा ने निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है। पिछले दो चुनाव से हार का सामना कर रही भाजपा के लिए रायगढ़ नगर निगम को अपने कब्जे में करना बड़ी चुनौती है, लिहाजा इस बार भाजपा हर हाल में मेयर और सभापति की कुर्सी पर बहुमत के साथ काबिज चाह रही है। यही वजह है कि इस बार भाजपा सोची समझी रणनीति के तहत शहर के दिग्गज चेहरों को चुनावी मैदान में उतर सकती है। चुनाव को लेकर भाजपा की अंदरूनी तौर पर बैठकें भी शुरू हो गई है।
दरअसल 48 वार्डों वाले रायगढ़ नगर निगम में पिछले दो चुनावों से भाजपा बहुमत नहीं ला पा रही है। इस सीट पर मेयर और सभापति की कुर्सी पर साल 2009 से 2014 तक भाजपा काबिज थी, लेकिन उसके बाद लगातार भाजपा को हर का सामना करना पड़ा है। साल 2014 में जहां इस सीट से किन्नर प्रत्याशी मधु बाई मेयर चुनी गई थीं तो वहीं बहुमत के साथ कांग्रेस का सभापति चुना गया था। साल 2019 के चुनाव में भी बहुमत के साथ कांग्रेस नगर निगम में काबिज हुई और मेयर और सभापति पर कांग्रेस का कब्जा रहा। ऐसे में इस बार भाजपा हर हाल में निगम की कुर्सी पर कब्जा करना चाह रही है। आलम ये है कि भाजपा इस बार सोची समझी रणनीति के तहत पुराने दिग्गज पार्षदों को फिर से चुनावी मैदान में उतारने की तैयारी में है। चुनाव के पहले भाजपा के पुराने बड़े चेहरे एक्टिव भी हो गए हैं। भाजपा के पदाधिकारी भी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि इस बार टिकट वितरण के दौरान नए पुराने चेहरों का ध्यान रखा जाएगा। बीजेपी पदाधिकारियों का कहना है कि कांग्रेस के पास 5 सालों की कोई उपलब्धि नहीं है लिहाजा कांग्रेस की नाकामी को उजागर करते हुए पुराने और जीतने योग्य चेहरों को भी वरीयता दी जाएगी। इधर कांग्रेस भी तीसरी पारी के लिए जीत को लेकर उत्साहित है। कांग्रेस का कहना है कि पिछले दो कार्यकाल से निगम ने कांग्रेस का प्रदर्शन बेहतर रहा है। जनता ने कांग्रेस के 5 सालों के कार्यकाल को बखूबी देखा है। कांग्रेस इस चुनाव में भी नए पुराने योग्य चेहरों के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी। इस बार भी निगम में जीत का परचम लहराएगा।














