आंकड़ों ने उड़ाई शिक्षा विभाग की नींद
न्यूज डेस्क। रायगढ़ जिले में गरीब परिवारों के बच्चे आरटीई के तहत स्कूलों में दाखिला तो ले रहे हैं लेकिन फिर ड्रॉप आउट होकर पढ़ाई से दूरी भी बना रहे हैं। जानकार हैरत होगी कि पिछले 5 सालों में 2261 बच्चों ने स्कूल में दाखिले के बाद बीच सत्र में ही पढ़ाई छोड़ दी। यह बच्चे वर्तमान में कहां अध्यनरत है इसकी कोई जानकारी शिक्षा विभाग के पास नहीं है। खास बात यह है यह सभी बच्चे निजी स्कूलों के हैं। सरकारी स्कूलों को मिलाकर शाला त्यागी बच्चों की संख्या 4400 से भी अधिक है। ऐसे में ये आंकड़े सर्व शिक्षा अभियान के आंकड़ों की पोल खोल रहे हैं।
दरअसल बीपीएल श्रेणी के गरीब परिवारों के बच्चों को निजी और सरकारी स्कूलों में आरटीई के तहत निशुल्क दाखिला दिया जाता है। रायगढ़ जिले में हर साल लगभग 2800 बच्चे आरटीई के तहत दाखिला लेते हैं। लेकिन स्कूलों में दाखिले के बाद कुछ बच्चे अनायास ड्रॉप आउट हो रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि पिछले 5 सालों में निजी स्कूलों से 2261 और सरकारी स्कूलों से लगभग 2200 बच्चे ड्रॉप आउट हो चुके हैं। खास बात यह है कि साल दर साल इनकी संख्या भी बढ़ रही है। साल 2019 में 304, साल 2020 में 199 साल 2021 में 538 साल 2022 में 604 और साल 2023 में 516 बच्चों ने पढ़ाई से दूरी बना ली। आंकड़े सामने आने के बाद छात्र संगठन सवाल उठा रहे हैं। यूथ कांग्रेस का कहना है की दाखिले के बाद भी बच्चे ड्रॉप आउट क्यों हो रहे हैं यह जांच का विषय है शिक्षा विभाग को इसका एनालिसिस करना चाहिए। अगर बच्चों को स्कूलों में सुविधाएं नहीं मिल रही हैं या बेहतर माहौल नहीं मिल रहा है तो इसकी मॉनीटरिंग कर बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ने की जरूरत है।
इधर मामले अधिकारी भी इन आंकड़ों का स्वीकार कर रहे हैं। मामले में जिला शिक्षा अधिकारी का कहना है की कई बच्चे पैरेंट्स के ट्रांसफर या फिर पलायन की वजह से दूसरे शहरों में चले गए हैं। ऐसे बच्चे कहीं ना कहीं अध्यनरत हैं। फिर भी स्कूलों के प्राचार्यों और संकुल समन्वयकों को ऐसे बच्चों को ट्रेस करने के निर्देश दिए हैं। ड्रॉप आउट बच्चों को फिर से स्कूलों में दाखिला दिलाया जाएगा।
ड्राप आउट बच्चों की जानकारी ली जा रही है। ऐसे बच्चों को फिर से शिक्षा की मुख्यधारा से जोडा जाएगा। संकुल समन्वयकों को ऐसे बच्चों को ट्रेस करने के निर्देश दिए गए हैं।
बी बाखला, डीईओ













