हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की तृप्ति और आत्मिक शांति के लिए बहुत खास माना जाता है। आषाढ़ माह की अमावस्या 14 जुलाई 2026 को मनाई जाएगी। माना जाता है कि आषाढ़ माह की अमावस्या के बाद वर्षा ऋतु और सावन का पवित्र महीना शुरू हो जाता है। इस साल आषाढ़ अमावस्या पर मंगलवार का विशेष संयोग बन रहा है, जिससे यह भौमवती अमावस्या भी कहलाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन कुछ विशेष चीजों का दान करने और पवित्र नदी में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है और जीवन में आ रही सारी परेशानियों से छुटकारा मिलता है। तो आइए जानते हैं कि इस दिन कौन सी चीजों का दान करना चाहिए।
पितृ दोष शांति के लिए अमावस्या पर जरूर करें इन चीजों का दान
काले तिल और जौ का दान
अमावस्या के दिन काले तिल और जौ का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र में तिल का संबंध राहु-केतु और शनि देव से भी माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन जरूरतमंद लोगों को तिल का दान करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में खुशहाली बनी रहती है।
जल से भरा घड़ा और छाता
आषाढ़ का महीना भीषण गर्मी के समापन और मानसून के आगमन का समय होता है, इसलिए इस समय राहगीरों और जरूरतमंदों को ठंडक पहुंचाना सबसे पुण्यदायी काम माना जाता है। मिट्टी के घड़े में साफ पानी दान करें और धूप और बारिश से बचने के लिए छाते का दान करने से पितरों की तृप्ति होती है।
अनाज का दान
अमावस्या के दिन अनाज का दान करना बहुत शुभ माना जाता है। माना जाता है कि इस दिन गेहूं, चावल, सत्तू या अपनी सामर्थ्य अनुसार सात प्रकार के अनाज का दान करने से पूर्वजों की आत्मा स्वतः ही तृप्त हो जाती है।
वस्त्रों का दान
पितृ दोष से परेशाान लोगों को अमावस्या तिथि पर नए या साफ-सुथरे वस्त्रों का दान जरूर करना चाहिए। किसी गरीब या असहाय व्यक्ति को सूती कपड़े, धोती, गमछा या चप्पल दान में दें। ध्यान रहे कि दान में दिए जाने वाले वस्त्र फटे या पुराने नहीं होने चाहिए।














