भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने साफ किया है कि रुपये को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाने और इसे ग्लोबल करेंसी के रूप में आगे बढ़ाने की उसकी योजना जारी है। हाल ही में लगाए गए कुछ प्रतिबंध केवल अस्थायी थे।
मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर ने कहा कि हाल के दिनों में करेंसी मार्केट में बढ़ती अस्थिरता को रोकने के लिए जो कदम उठाए गए थे, वे सिर्फ कुछ समय के लिए थे।
उन्होंने 30 मार्च और 1 अप्रैल को लागू किए गए उन नियमों का जिक्र किया, जो डॉलर की कमी और सट्टेबाजी को रोकने के लिए लगाए गए थे।
टी. रबी शंकर ने कहा कि आरबीआई का लंबी अवधि का लक्ष्य रुपये को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाना है। उनका कहना था कि दुनिया में कहीं भी कोई व्यक्ति रुपये से जुड़े जोखिम के लिए वित्तीय उत्पादों का इस्तेमाल कर सके, यही उद्देश्य है।
हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि नेट ओपन पोजीशन पर लगी 100 मिलियन डॉलर की सीमा कब हटाई जाएगी।
उन्होंने कहा कि आरबीआई तभी हस्तक्षेप करता है जब बाजार में बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव या गड़बड़ी होती है। हालिया कार्रवाई रुपये की कीमत में बदलाव की वजह से नहीं, बल्कि सट्टेबाजी को रोकने के लिए की गई थी।
आगे उन्होंने कहा कि रुपये की कीमत भविष्य में पूरी तरह बाजार की मांग और आपूर्ति पर निर्भर करेगी। आरबीआई का काम सिर्फ बाजार को स्थिर और सुचारू बनाए रखना है।
टी. रबी शंकर ने यह भी कहा कि अगर हालात बिगड़ते हैं, तो आरबीआई कोविड-19 के समय की तरह बाजार को स्थिर करने के लिए सख्त कदम उठा सकता है।
इसके अलावा, आरबीआई ने हाल ही में अपने 1 अप्रैल के आदेश में कुछ ढील देते हुए अधिकृत डीलरों को कुछ विशेष डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, जिसे राहत का संकेत माना जा रहा है।














