दांत निकलने के दौरान बच्चे अचानक खाने के समय चिड़चिड़े हो जाते हैं. जैसे ही यह बदलाव आता है, माता-पिता घबरा जाते हैं. लेकिन यह समझना जरूरी है कि दांत निकलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. लगभग 6 महीने की उम्र से लेकर 3 साल तक के बीच बच्चों के 20 दूध के दांत मसूड़ों से बाहर आते हैं. हर दांत निकलने में करीब डेढ़ हफ्ते का समय लग सकता है. इस दौरान हम प्रक्रिया को रोक नहीं सकते, लेकिन बच्चे की तकलीफ जरूर कम कर सकते हैं.
क्या होता है दांत निकलने का लक्षण?
दांत निकलने के सामान्य लक्षणों में मसूड़ों की सूजन, बार-बार रोना, चिड़चिड़ापन, हर चीज मुंह में डालने की कोशिश, ज्यादा लार आना, चेहरे पर रैश, नींद के पैटर्न में बदलाव और भूख कम होना शामिल हैं. हल्का बुखार हो सकता है, लेकिन तेज बुखार दांत निकलने का संकेत नहीं होता. अगर दिन में तीन-चार बार पतले दस्त हो रहे हैं, तो यह अक्सर मुंह में चीजें डालने से हुए इंफेक्शन का परिणाम हो सकता है.
ऐसे में क्या करें?
अब सवाल आता है कि ऐसे में क्या करें, तो सबसे पहले बच्चे को ठंडी और सुरक्षित चीजें चबाने के लिए दें. ठंडे टीथर, फ्रूट निबलर या घर पर बनाए गए हल्के फ्रूट पॉप्सिकल मसूड़ों को राहत देते हैं. टीथर को 10-15 मिनट फ्रीजर में ठंडा करके दें. ठंडा गीला कपड़ा उंगली पर लपेटकर बच्चे को चबाने दें या साफ गॉज से हल्की मसाज करें. हर चीज को अच्छी तरह साफ और स्टेरिलाइज करना जरूरी है. खाने के समय ठंडी दही-चावल, नरम फल या ऐसे खाद्य पदार्थ दे सकते हैं जिन्हें बच्चा हल्के से चबा सके. इस दौरान भूख कम होना सामान्य है, इसलिए जबरदस्ती खिलाने से बचें. दो हफ्तों से ज्यादा भूख में कमी रहे तो डॉक्टर से सलाह लें. नियमित समय पर उम्र के अनुसार भोजन देते रहें और जरूरत हो तो थोड़ा अतिरिक्त दूध और तरल दें.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स में पब्लिश एक रिसर्च स्टडी जिसमें 19,422 दिनों तक बच्चों के लक्षणों को दर्ज किया गया और 475 बार दांत निकलने की घटनाओं का एनालिसिस किया गया. इसमें पाया गया कि दांत निकलने से जुड़े लक्षण केवल एक सीमित 8 दिनों की अवधि में ज्यादा दिखते हैं, चार दिन पहले, जिस दिन दांत निकलता है और उसके तीन दिन बाद तक. दिलचस्प बात यह रही कि कोई भी एक लक्षण इतना आम नहीं था कि उससे पक्का कहा जा सके कि दांत निकलने वाला है. रिसर्चर ने साफ कहा कि हल्के लक्षण दांत निकलने के दौरान हो सकते हैं, लेकिन अगर बच्चा तेज बुखार या गंभीर परेशानी में है, तो उसे सिर्फ टीथिंग मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.














