सिर्फ तीस तैराक, दो मोटर बोट, गोताखोरों के पद ही स्वीकृत नहीं
रायगढ़ जिले में हर साल बारिश में महानदी के किनारे दर्जनों गांव बाढ की चपेट में आते हैं। कई गांव कई कई दिनों तक टापू बन जाते हैं। हर साल बाढ के हालातों कें बावजूद रायगढ़ जिला बाढ आपदा के दौरान राहत के लिए तैयार नहीं है। जानकर हैरत होगी कि बाढ आपदा के दौरान रेस्क्यू के लिए जिले में सिर्फ दो बोट मौजूद हैं। जिले में गोताखोरों के न होने की वजह से तैराकों के भरोसे रेस्क्यू अभियान चल रहा है। सिर्फ तीस जवानों के भरोसे जिला प्रशासन बाढ आपदा के लिए तैयार होने का दावा कर रहा है।
दरअसल रायगढ़ व सरहदी जिले सारंगढ क्षेत्र का सरिया बरमकेला और पुसौर ब्लाक बाढ के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील है। महानदी के तट पर बसा होने की वजह से हर साल महानदी किनारे के 45 गांव बाढ की चपेट में आते हैं। डेढ दर्जन से अधिक गांव हर साल बारिश में टापू बन जाते हैं। ऐसे में जिला प्रसासन होमगार्ड के जवानों के भरोसे रेस्क्यू आपरेशन चलाता है। लेकिन जानकर हैरत होगी कि जिले में बाढ आपदा से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन ही मौजूद नहीं है। होमगार्ड के 30 जवानों को रेस्क्यू के लिए रिजर्व रखा गया है। लेकिन इन जवानों में कोई भी गोताखोर नहीं है , बल्कि इन्हें तैराकी की ट्रेनिंग मिली है। जिले में रेस्क्यू के लिए दो मोटर बोट हैं जबकि चार मोटर बोट की रिक्वायरमेंट है। इसके अलावा जिले में कोई भी स्कूबा डाइवर जवान मौजूद नहीं है। बड़ा हादसा होने पर एसडीआर एफ या फिर एनडीआरएफ की टीम को काल किया जाता है। चंद लाइफ जैकेट, और हाइमास्क लैंप के जरिए होमगार्ड के जवान जान पर खेलकर लोगों की जान बचाते हैं। जिले के अधिकारी भी दबी जुबान से संसाधनों की कमी की बात स्वीकार कर रहे हैं। हालांकि कैमरे के सामने अधिकारी सारी तैयारियां पुख्ता होने का दावा कर रहे हैं। होमगार्ड के कमांडेट का कहना है कि राज्य शासन से 2 मोटर बोट की मांग की गई है। समय समय पर संसाधनों की रिक्वायरमेंट भी भेजी जाती है। जवानों को हर साल बारिश पूर्व माकड्रिल कर तैयार किया जाता है। जिला बाढ आपदा से निपटने के लिए तैयार है।















