रायगढ़ जिले में पुलिस साइबर अपराध रोकने जागरूकता अभियान चला रही है तो वहीं दूसरी ओर जिले में साइबर ठगी के मामले कम ही नहीं हो रहे हैं। जानकर हैरत होगी कि जिले में 6 महीने के भीतर ही साइबर फ्रॉड के 53 मामले दर्ज हो चुके हैं। साल 2023 में भी साइबर ठगी के 70 मामले जिले के अलग-अलग थानों में दर्ज किए गए थे। खास बात यह है कि पुलिस अपराध होने पर मामले तो दर्ज कर रही है लेकिन अपराधी बाहरी होने की वजह से उन्हें पकड़ने और राशि की रिकवरी में पुलिस के पसीने छूट रहे हैं।
रायगढ़ जिले में पिछले कुछ महीनों से साइबर ठगी के मामले अनायास पढ़ रहे हैं। डेढ़ सालों में पुलिस ने अलग-अलग थानों में साइबर ठगी के 123 मामले दर्ज किए हैं। ज्यादातर मामलों में अपराधी मोबाइल पर कस्टमर केयर का फर्जी लिंक भेज कर या फिर दोगुना मुनाफे का लालच देकर लोगों को चूना लगा रहे हैं। जून महीने में ही शेयर मार्केट में रकम दोगुनी करने का झांसा देकर धर्मजयगढ़ की एक महिला से 50 लाख और एक अन्य व्यक्ति से 30 लाख से अधिक की ठगी हुई है। अधिकांश मामलों में पुलिस ने अपराध तो दर्ज किया है लेकिन अपराधी दीगर प्रदेशों के होने की वजह से उनकी गिरफ्तारी और ठगी गई राशि की रिकवरी नहीं कर पाई है। खास बात यह है कि जिले में बढ़ते साइबर अपराधों को देखते हुए राज्य शासन ने साइबर थाने का सेपरेट सेटअप शुरू करने की घोषणा की थी लेकिन अब तक इस पर भी काम शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में पुलिस पश्त और अपराधियों के हौसले मस्त हैं। स्थानीय लोगों का कहना है की पुलिस को बढ़ते अपराधों को देखते हुए अपडेट होने की जरूरत है। अगर जिले में साइबर थाने की स्थापना जल्दी हो जाती है तो जटिल मामलों को क्रैक करने में मदद मिल सकेगी। इधर मामले में पुलिस अधिकारी भी अपराध बढ़ने की बात स्वीकार कर रहे हैं। एडिशनल एसपी आकाश मरकाम का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में अनायास साइबर ठगी के मामले बड़े हैं। इसे रोकने के लिए जिले में लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गांवों में कैंप लगाकर ग्रामीणों को भी समझाइश दी जा रही है। हाल ही में शासन ने साइबर थाने की स्वीकृति दी है। इस दिशा में जल्द कार्य शुरू किया जाएगा। साइबर थाने की स्थापना से साइबर अपराधों को रोकने में काफी मदद मिल सकेगी।














