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जन्माष्टमी के उत्सव पर क्यों फोड़ते हैं दही की मटकी, जानें क्या है परंपरा और कब हुई शुरुआत

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव 4 सितंबर को मनाया जाएगा। धूमधाम से घरों से लेकर मंदिरों में लोग कृष्ण की बाल लीलाओं की झांकी सजाते हैं और पूजन करते हैं और भगवान का जन्म मनाते है लेकिन एक परंपरा जो जन्माष्टमी के साथ जुड़ी है वो है दही हांडी फोड़ने का उत्स, गोविंदा बनकर ऊंचे में बांधी हांडी को फोड़ने के लिए बकायदा प्रतियोगिता कराई जाती है। लेकिन मन में सवाल उठता है कि आखिर इस दही हांडी उत्सव का जन्माष्टमी से क्या कनेक्शन है। अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल आते हैं तो यहां जानें आखिर जन्माष्टमी पर दही हांडी का उत्सव क्यों मनाया जाता है और सबसे पहले कहां हुई इसकी शुरुआत।

कैसे हुई दही हांडी उत्सव की शुरुआत
पौराणिक कथाओं के अनुसार बचपन में भगवान कृष्ण को माखन अत्यंत प्रिय था। रोजाना वो अपने सखाओं के साथ मिलकर माखन खाने के लिए गोपियों के घर से मक्खन चुराते थे और इसी वजह से कन्हैया का एक नाम माखन चोर भी है। गोपियां कन्हैया और उनके सखाओं से दही और माखन को बचाने के लिए ऊंची जगहों पर टांग देती थी। जिससे छोटे-छोटे सखा और कन्हैया उस तक पहुंच ना सकें। लेकिन भगवान की लीला ऐसी होती कि वो हर रोज मटकी को फोड़कर उसमे रखा दही और माखन सब खा जाते।

भगवान की इसी लीला को दही हांडी उत्सव में दिखाया जाता है। जब गोविंदा बनकर लोग दही की मटकी को फोड़ते हैं। भगवान की ऐसी ही अनेक बाल लीलाओं का वर्णन श्रीमद्भागवत गीता के महापुराण के दशम स्कन्ध में मिलता है।

कैसे मनाया जाता है दही हांडी उत्सव
दही हांडी उत्सव जन्माष्टमी के अगले दिन मनाया जाता है। ऊंचे स्थान पर मिट्टी की मटकी को टांगा जाता है और इस मटकी में दही, माखन, मिठाईयां, शहद भरा होता है। जिसे तोड़ने के लिए प्रशिक्षित लड़के-लड़कियां मिलकर इंसानी पिरामिड बनाते हैं और फिर उसे फोड़ने की कोशिश करते हैं। ये उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है। ढोल-नगाड़े, भजन-कीर्तन के साथ लोग इसमे शामिल होते हैं।

कब हुई दही हांडी उत्सव की शुरुआत
माना जाता है कि इस उत्सव की शुरुआत 1907 में नवी मुंबई के घनसोली गांव में पहली बार इस उत्सव को मनाया गया था। फिर धीरे-धीरे ये उत्सव मुंबई, फिर महाराष्ट्र और अब देशभर के अलग-अलग हिस्सों में इस उत्सव को मनाया जाता है।

क्यों खास है ये उत्सव
इस उत्सव का महत्व केवल धार्मिक नहीं है बल्कि ये समाज में एक जुट होकर टीम वर्क की तरह काम करने के लिए प्रेरणा की तरह है। इस उत्सव में आपसी सहयोग की भावना पर बल दिया जाता है। इस उत्सव को कई जगहों पर काफी बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। हांडी फोड़ने वाले को इनाम राशि दी जाती है।

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