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अंजिनी मिश्रा की कृष्ण वंदना से शुरू हुई चक्रधर समारोह की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या

रायगढ़, 18 सितम्बर 2026। 41वें अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त चक्रधर समारोह-2026 की पांचवीं सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ बिलासपुर की रायगढ़ घराने की कथक नृत्यांगना अंजिनी मिश्रा की मनमोहक प्रस्तुति से हुआ। उन्होंने कृष्ण वंदना के साथ कथक की प्रस्तुति आरंभ की। भावपूर्ण अभिनय, आकर्षक पद संचालन और लय-ताल के सधे हुए समन्वय ने मंच पर ऐसा वातावरण रचा कि दर्शक पूरी प्रस्तुति के दौरान मंत्रमुग्ध रहे।
अंजिनी मिश्रा ने राजा चक्रधर सिंह की रचनाओं पर आधारित घाट, उपोड़धा, परण, पैरों की तिहाई, चालन, भाव, गतभाव एवं कवित्त की प्रस्तुतियां दीं। कथक की बारीकियों, भावाभिव्यक्ति और पद संचालन के माध्यम से उन्होंने रायगढ़ घराने की विशिष्ट नृत्य परंपरा को प्रभावी ढंग से मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति में तकनीकी पक्ष के साथ भाव और अभिनय का सुंदर संतुलन देखने को मिला। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रस्तुत ठुमरी ने सांस्कृतिक संध्या को भावपूर्ण विराम दिया। अंजिनी मिश्रा के साथ तबले पर गुरु भूपेंद्र बरेठ और गायन पर गुरु साहिल ने संगत प्रदान की। तबले की सधी हुई थाप, गायन के सुर और कथक की लयकारी के सुंदर मेल ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बना दिया।

तीन वर्ष की उम्र से शुरू हुई नृत्य साधना

अंजिनी मिश्रा ने महज तीन वर्ष की उम्र से नृत्य साधना प्रारंभ की। पिछले 15 वर्षों से वे संगीत नाटक अकादमी रत्न एवं पद्मश्री सम्मानित पंडित रामलाल बरेठ तथा उनके सुपुत्र गुरु भूपेंद्र बरेठ से कथक की शिक्षा प्राप्त कर रही हैं। अपनी निरंतर कला साधना के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर कथक की प्रस्तुतियां दी हैं। इनमें मलेशिया सहित विदेशों के मंच भी शामिल हैं। अंजिनी मिश्रा भारत सरकार की सीसीआरटी छात्रवृत्ति प्राप्त कलाकार भी हैं। चक्रधर समारोह के मंच पर अपनी पहली प्रस्तुति में उन्होंने अपनी कला साधना के साथ रायगढ़ घराने की समृद्ध कथक परंपरा, गुरु-शिष्य परंपरा और राजा चक्रधर सिंह की संगीत एवं नृत्य साधना की विरासत को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

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